नई दिल्ली: हाल ही में जदयू में शामिल हुए चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर का कहना है कि पीएम मोदी बड़े नेता हैं, लेकिन 2014 जैसी मोदी लहर 2019 के चुनाव में मुश्किल है. 2014 के लोकसभा चुनाव में टीम मोदी का हिस्सा रहे प्रशांत किशोर ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में कहा कि बीजेपी बाकी पार्टियों की तुलना में अब भी बढ़त में है. अगर आज लोकसभा चुनाव हुए तो बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी, लेकिन बीजेपी अकेले 272 के आंकड़े को पार नहीं कर पाएगी. प्रशांत किशोर ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कोई लहर नहीं होगी. आने वाले लोकसभा चुनाव में लोग किसी एक नेता को नहीं बल्कि उम्मीदवारों को देखकर वोट देंगे.

प्रशांत किशोर का कहना है कि भारत के 70 प्रतिशत लोग प्रतिदिन 100 रुपए से कम कमा रहे हैं. उनके दिमाग को पढ़ना मुश्किल है. वे मूकदर्शक हैं. आप उनके दिमाग को पढ़ सकते हैं जो अपनी बात रखते हैं. 70 से 80 करोड़ लोग राजनीति पर बात नहीं करना चाहते क्योंकि वे अपनी दिनचर्या में व्यस्त हैं. उन्हें दो जून की रोटी की चिंता है. गरीब लोग अपना पोलिटिकल ओपिनियन नहीं रखते लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उनके पास कोई राजनीतिक ओपिनियन नहीं है. सत्ता में रहने वाली पार्टी का डर भी होता है. कोई उनके खिलाफ कुछ नहीं बोलना चाहता लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे सत्ता में रहने वाली पार्टी को ही वोट देंगे. प्रशांत किशोर ने कहा कि मेरी नजर में 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी लीड करेगी लेकिन यह कहना कि उसके सामने कोई चुनौती नहीं है गलत होगा.

राममंदिर के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने कहा कि इसे सुप्रीम कोर्ट पर ही छोड़ देना चाहिए और सभी को कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए. जेडीयू में शामिल होने के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने कहा कि वह नीतीश कुमार से प्रभावित थे और बिहार के लिए काम करना चाहते थे. हाल ही में बिहार में सत्ताधारी पार्टी में शामिल हुए किशोर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सबसे करीबी माना जाता है. कई पार्टियों के लिए चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम कर चुके किशोर वर्ष 2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार के करीब आए थे.

राष्ट्रीय जनता दल के साथ महागठबंधन बनाने की बात हो, नीतीश कुमार को बिहार में सर्वमान्य नेता के रूप में स्थापित करने की बात हो, प्रशांत किशोर हमेशा बिहार के मुख्यमंत्री के करीबी के रूप में ही सामने आते रहे. नीतीश कुमार ने उनकी इस करीबी का प्रमाण भी दिया था, जब बिहार में सरकार गठन के बाद किशोर को कैबिनेट स्तर का दर्जा दिया गया. हालांकि किशोर की यह हैसियत कुछ ही दिन बरकरार रही. इस बीच उनके बारे में सियासी कयास लगते रहे कि वे एक बार फिर अपने पुराने सहयोगी पीएम नरेंद्र मोदी के खेमे में जा रहे हैं या देश के अन्य राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियों के चुनावी रणनीतिकार बन रहे हैं. इन तमाम कयासों को उनके जदयू में शामिल होने के बाद से विराम दे दिया गया.