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5 एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी: रामचंद्र गुहा बोले- आज गांधी होते तो मोदी सरकार उन्हें भी गिरफ्तार कर चुकी होती
प्रबुद्ध वामपंथी कार्यकर्ताओं के घरों में छापेमारी और माओवादियों से संबंध रखने के संदेह में पांच कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद सरकार की हर तरफ आलोचना हो रही है.
नई दिल्ली: महाराष्ट्र पुलिस द्वारा मंगलवार को कई राज्यों में प्रबुद्ध वामपंथी कार्यकर्ताओं के घरों में छापेमारी और माओवादियों से संबंध रखने के संदेह में पांच कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद मानवाधिकार के पैरोकारों और बुद्धिजिवियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. लेखक और इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने सरकार के इस कदम को ‘क्रूर, सत्तावादी, दमनकारी, मनमाना और अवैध’ बताया. इतना ही नहीं गुहा ने इसके लिए सत्तारूढ़ सरकार के कॉर्पोरेट क्रोनियों को दोषी ठहराया है. गुहा ने आरोप लगाया कि ये लोग आदिवासियों की भूमि, वन और खनिज संसाधनों को कब्जा करना चाहते हैं. गुहा ने कहा कि इन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का सीधा सा मतलब आदिवासियों के एकमात्र प्रतिनिधित्व को रास्ते से हटना है.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के घर छापे और गिरफ्तारी के गुहा ने ट्वीट किया, ‘गांधी की जीवनी लिखने की वजह से मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं कि अगर आज महात्मा जिंदा होते तो उन्होंने अपनी वकालत की वर्दी को पहन लिया होता और सुधा भारद्वाज के पक्ष में कोर्ट में खड़े होते. ये मानते हुए कि मोदी सरकार उनको न तो गिरफ्तार किया होता न ही हिरासत में लिया होता. उन्होंने एक और ट्वीट किया ‘सुधा भारद्वाज हिंसा और गैर-कानूनी चीजों से उतनी ही दूर हैं जितना अमित शाह इन चीजों के करीब हैं.
As a biographer of Gandhi, I have no doubt that if the Mahatma was alive today, he would don his lawyer’s robes and defend Sudha Bharadwaj in court; that is assuming the Modi Sarkar hadn’t yet detained and arrested him too
— Ramachandra Guha (@Ram_Guha) August 28, 2018
पुलिस की इस कार्रवाई पर प्रसिद्ध लेखिका अरुंधती रॉय ने कहा, ‘ये गिरफ्तारियां उस सरकार के बारे में खतरनाक संकेत देती हैं जिसे अपना जनादेश खोने का डर है, और दहशत में आ रही है. बेतुके आरोपों को लेकर वकील, कवि, लेखक, दलित अधिकार कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को गिरफ्तार किया जा रहा है …हमें साफ – साफ बताइए कि भारत किधर जा रहा है.’
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सिविल लिबर्टिज कमेटी के अध्यक्ष गद्दम लक्ष्मण ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि वह बुद्धिजीवियों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है. लक्ष्मण ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम कानूनी विशेषज्ञों से मशविरा कर रहे हैं. हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे …उनकी गिरफ्तारी मानवाधिकारों का घोर हनन है. वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ट्वीट किया, ‘फासीवादी फन अब खुल कर सामने आ गए हैं.’ उन्होंने कहा, ‘यह आपातकाल की स्पष्ट घोषणा है. वे अधिकारों के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ बोलने वाले किसी भी शख्स के पीछे पड़ रहे हैं. वे किसी भी असहमति के खिलाफ हैं.
नागरिक अधिकार कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने भी छापेमारियों की कड़ी निंदा की. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘महाराष्ट्र, झारखंड, तेलंगाना, दिल्ली, गोवा में सुबह से ही मानवाधिकार के रक्षकों के घरों पर हो रही छापेमारी की कड़ी निंदा करती हूं. मानवाधिकार के रक्षकों का उत्पीड़न बंद हो. मोदी के निरंकुश शासन की निंदा करती हूं.’
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया और ऑक्सफैम इंडिया ने संयुक्त बयान में कहा कि देशभर में सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई विचलित करने वाली है और यह मानवाधिकारों के मूल सिद्धांतों के लिए खतरा है.एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक आकार पटेल ने कहा, ‘आज की गिरफ्तारियां मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों पर ऐसी दूसरी कार्रवाई है जो सरकार के आलोचक रहे हैं. इन सभी लोगों का भारत के सबसे गरीब और उपेक्षित लोगों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए काम करने का इतिहास रहा है. उनकी गिरफ्तारियों से ये विचलित करने वाले सवाल पैदा होते हैं कि क्या उन्हें उनके काम के लिए निशाना बनाया जा रहा है.’
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ऑक्सफैम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहर ने कहा, ‘‘ये गिरफ्तारियां सामान्य नहीं हो सकती. सरकार को डर का माहौल बनाने के बजाय अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण रूप से एकत्रित होने के लोगों के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए.’ पिछले साल 31 दिसंबर को एलगरर परिषद के एक कार्यक्रम के बाद पुणे के पास कोरेगांव- भीमा गांव में दलितों और उच्च जाति के पेशवाओं के बीच हुई हिंसा की घटना की जांच के तहत ये छापे मारे गए हैं. जून में दलित कार्यकर्ता सुधीर धावले को मुंबई में उनके घर से गिरफ्तार किया गया था, जबकि वकील सुरेंद्र गाडलिंग, कार्यकर्ता महेश राऊत और शोमा सेन को नागपुर से तथा रोना विल्सन को दिल्ली में मुनिरका स्थित उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था.
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