Mohan Bhagwat Dussehra Speech 2020: देशभर में आज विजयादशमी मनाई जा रही है. हर साल की तरह इस साल भी दशहरे (Dussehra 2020) के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में शस्त्र पूजा (Shashtra Pooja) की. इस दौरान हर साल आरएसएस मुख्यालय में कार्यक्रम आयोजित होता है. कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 2019 में, अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी हो गया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अयोध्या का फैसला दिया. पूरे देश ने फैसले को स्वीकार कर लिया. 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर की आधरशिला समारोह आयोजित की गई थी. हमने इन घटनाओं के दौरान भारतीयों के धैर्य और संवेदनशीलता को देखा.Also Read - Keshav Prasad Maurya: अखबार डालने से उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री तक, ऐसा है केशव प्रसाद मौर्य का Profile

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कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि विश्व के अन्य देशों की तुलना में हमारा भारत संकट की इस परिस्थिति में अधिक अच्छी तरह से खड़ा हुआ दिखाई देता है. Also Read - Malegaon Blast Case: गवाह बोला- ATS ने योगी आदित्‍यानाथ समेत RSS के 4 लोगों का झूठा नाम लेने के लिए मुझे टॉर्चर किया था

संघ प्रमुख ने कहा कि भारत में इस महामारी की विनाशकता का प्रभाव बाकी देशों से कम दिखाई दे रहा है, इसके कुछ कारण हैं. भागवत ने कहा कि सभी परिस्थिति में कोरोना वायरस से होने वाला नुकसान भारत में कम है. भारत ने कोरोना के बारे में पहले से अनुमान लगाया और शासन-प्रशासन ने नियम लागू किया और उपाय भी बताया. प्रशासन ने ये तय किया इन उपायों पर अमल हो ये भी सुनिश्चित किया.

उन्होंने कहा कि भारत में कोरोना के कारण नुकसान कम हुआ है, क्योंकि सरकार ने जनता को पहले से सतर्क कर दिया था. एहतियाती कदम उठाए गए और नियम बनाए गए. लोगों ने अतिरिक्त सावधानी बरतीं, क्योंकि उनके मन में कोरोना का डर था. सभी ने अपना काम किया.

संघ प्रमुख ने कहा कि, ‘हमने देश में तनाव पैदा करने वाले CAA विरोधों को देखा. इससे पहले कि इस पर आगे चर्चा की जा सके, इस साल कोरोना पर ध्यान केंद्रित किया गया. इसलिए, कुछ लोगों के दिमाग में सांप्रदायिक भड़कना केवल उनके दिमाग में रहा. मोहन भागवत ने कहा कि सीएए किसी भी विशिष्ट धार्मिक समुदाय का विरोध नहीं करता है. फिर भी कुछ लोगों ने इस कानून का विरोध किया और हमारे मुस्लिम भाइयों को उनके झूठे प्रचार से गुमराह किया कि यह कानून मुस्लिम आबादी को प्रतिबंधित करने के लिए लाया गया था. इसलिए विरोध प्रदर्शन हुए.