RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, भारत को बताया हिंदू राष्ट्र; बोले- अगले जन्म...

कोलकाता में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू राष्ट्र, संविधान की प्रस्तावना और भाजपा-आरएसएस संबंधों पर खुलकर अपनी बात रखी. आइए जानते हैं उन्होंने क्या-क्या कहा?

Published date india.com Published: December 21, 2025 9:31 PM IST
RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, भारत को बताया हिंदू राष्ट्र; बोले- अगले जन्म...

कोलकाता में RSS के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संविधान और हिंदुत्व को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में भले ही हिंदू शब्द न लिखा हो, लेकिन उसमें जिन मूल्यों की बात की गई है, वे सभी हिंदू दर्शन से ही आए हैं. न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे विचार किसी विदेशी सोच से नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा से निकले हैं. भागवत ने याद दिलाया कि बाबा साहेब आंबेडकर ने खुद कहा था कि उन्होंने ये विचार फ्रांस से नहीं बल्कि गीता, बुद्ध और भारतीय दर्शन से लिए हैं. उनके मुताबिक, संविधान की आत्मा में ही हिंदुत्व की झलक साफ दिखाई देती है.

हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर भागवत की दलील

मोहन भागवत ने कहा कि धर्म पर आधारित संविधान किसी एक धर्म को थोपने की बात नहीं करता, बल्कि सभी को समान अधिकार देता है और यही हिंदू राष्ट्र की असली विशेषता है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर हिंदू शब्द संविधान में नहीं है, तो क्या इससे देश का स्वभाव बदल जाता है? उनका कहना था कि हिंदू राष्ट्र कोई नई या राजनीतिक अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हजारों साल पुरानी सभ्यता का स्वाभाविक रूप है. जैसे सूर्य पूर्व में उगता है और इसके लिए किसी प्रमाण या मंजूरी की जरूरत नहीं, वैसे ही भारत का हिंदू राष्ट्र होना भी स्वाभाविक सत्य है.

हिंदू राष्ट्र शब्द जरूरी नहीं, भावना जरूरी है

RSS प्रमुख ने साफ कहा कि अगर भविष्य में संसद चाहे तो हिंदू राष्ट्र शब्द जोड़ सकती है और अगर न भी जोड़े तो कोई फर्क नहीं पड़ता. उनके मुताबिक, शब्द से ज्यादा जरूरी भावना और स्वभाव है. उन्होंने कहा कि भारत को मातृभूमि मानने वाला, भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाला और अपने पूर्वजों पर गर्व करने वाला व्यक्ति जब तक इस धरती पर मौजूद है, तब तक भारत हिंदू राष्ट्र रहेगा. यह एक सच्चाई है जिसे बदला नहीं जा सकता, चाहे वह लिखा जाए या न लिखा जाए.

भाजपा-RSS संबंध कैसे? भागवत ने बताया

भाजपा और आरएसएस के बीच दूरी की चर्चाओं पर मोहन भागवत ने दो टूक जवाब दिया. उन्होंने कहा कि संघ हमेशा से सत्ता और राजनीतिक नेतृत्व से एक दूरी बनाए रखता है, चाहे वह जनसंघ का दौर हो या आज का समय. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के कई नेता संघ के स्वयंसेवक हैं, जिनमें नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे नाम शामिल हैं. इस वजह से व्यक्तिगत निकटता स्वाभाविक है, लेकिन इसमें कोई राजनीतिक सौदेबाजी नहीं है. मीडिया में जो दूरियों और नजदीकियों की बातें चलती हैं, वे वास्तविकता से दूर हैं.

क्या है RSS संघ का लक्ष्य?

संघ के उद्देश्य पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस का लक्ष्य सत्ता पाना नहीं, बल्कि समाज को संगठित करना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के अंदर हिंदू समाज बनाना लक्ष्य नहीं है, बल्कि पूरे हिंदू समाज को एकजुट करना ही असली मकसद है. यह काम आज हो या कल, संघ तब तक करता रहेगा जब तक लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि रास्ते में बाधाएं आएंगी, लेकिन संघ रुकने वाला नहीं है. अगर यह जीवन में पूरा नहीं हुआ, तो अगला जन्म लेकर भी यही काम किया जाएगा. यही संघ की सोच और प्रतिबद्धता है.

(इनपुट-एजेंसी के साथ)

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