विजयादशमी के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के चीन पर दिए बयान को लेकर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने रिएक्शन दिया है. राहुल गांधी ने कहा कि मोहन भागवत सच जानते हैं, लेकिन उसका सामना करने से डरते हैं. बता दें कि वार्षिक दशहरा रैली में भागवत ने कहा था कि ‘चीनी घुसपैठ पर भारत की प्रतिक्रिया से चीन सकते में है. चीन की अपेक्षा भारत को अपनी शक्ति एवं दायरा बढ़ाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा था, ‘चीन ने महामारी के बीच में हमारी सीमाओं का अतिक्रमण किया.’ उन्होंने कहा कि उस देश (चीन) की विस्तारवादी प्रकृति से पूरी दुनिया अवगत है. उन्होंने ताइवान एवं वियतनाम का उदाहरण चीन की विस्तारवादी योजना के रूप में दिया था. Also Read - मैं पार्टी में जाति, धर्म आधारित प्रकोष्ठ के पक्ष में नहीं हूं: नितिन गडकरी

राहुल गांधी ने न्यूज एजेंसी ANI के एक ट्वीट को रिट्वीट करते हुए कहा, ‘कहीं न कहीं भागवत सच्चाई जरूर जानते हैं, लेकिन वे इसका सामना करने में डरे हुए हैं. चीन ने हमारी जमीन हथियाई है और भारत सरकार और RSS ने ऐसा होने देने की अनुमति दी है.’

बता दें कि संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में शस्त्र पूजा (Shashtra Pooja) की. इस दौरान उन्होंने चीन को लेकर कड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिक्रिया से पहली बार चीन सहम और ठिठक गया. उसकी गलतफहमी दूर हो गई. हालांकि, मोहन भागवत ने भारत को अब और अधिक सतर्क रहने का सुझाव देते हुए सामरिक और आर्थिक रूप से चीन से ज्यादा मजबूत बनने पर जोर दिया.

मोहन भागवत ने वैश्विक महामारी में चीन की भूमिका भी संदिग्ध बताई. आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर से संबोधन में कहा, चीन ने सामरिक बल के गर्व में हमारी सीमाओं का अतिक्रमण करने की कोशिश की. भारत ही नहीं उसने ताइवान, वियतनाम, अमेरिका और जापान के साथ भी झगड़ा मोल लिया. इस बार भारत ने जो प्रतिक्रिया दी, उसके कारण वो सहम गया, उसे धक्का मिला, क्योंकि भारत तन कर खड़ा हो गया.

उन्होंने कहा कि सेना ने वीरता का परिचय दिया, नागरिकों ने देशभक्ति का परिचय दिया. सामरिक और आर्थिक दोनों कारणों से वह ठिठक जाए, इतना धक्का तो उसे मिला. उसके चलते अब दुनिया के दूसरे देशों ने भी चीन को डांटना शुरू किया. मोहन भागवत ने चीन से टकराव के बाद भारत को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत बताई. भागवत ने कहा, हमको अधिक सजग रहने की जरूरत है, क्योंकि जो नहीं सोचा था उसने (चीन), ऐसी परिस्थिति खड़ी हो गई. इस प्रतिक्रिया में वह (चीन) क्या करेगा, नहीं पता है. इसलिए इसका उपाय क्या है. सतत सावधानी, सजगता और तैयारी.

मोहन भागवत ने चीन को रोकने के लिए भारत को सामरिक और आर्थिक के साथ अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उससे शक्तिशाली बनने पर जोर दिया. मोहन भागवत ने पड़ोसी देशों के साथ संबंध और अधिक दुरुस्त करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल ऐसे हमारे पड़ोसी देश, जो हमारे मित्र भी हैं और बहुत मात्रा में समान प्रकृति के देश हैं, उनके साथ हमें अपने सम्बन्धों को अधिक मित्रतापूर्ण बनाने में अपनी गति तीव्र करनी चाहिए.

मोहन भागवत ने चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा, हम सभी से मित्रता चाहते हैं. वह हमारा स्वभाव है. परन्तु हमारी सद्भावना को दुर्बलता मानकर अपने बल के प्रदर्शन से कोई भारत को चाहे जैसा नचा ले, झुका ले, यह हो नहीं सकता, इतना तो अब तक ऐसा दुस्साहस करने वालों को समझ में आ जाना चाहिए. हम दुर्बल नहीं है. उनकी गलतफहमी दूर हो गई.

(इनपुट: एजेंसी)