नई दिल्लीः मध्य प्रदेश में सत्ता का रास्ता मालवा-निमाड़ क्षेत्र से होकर गुजरता है. कहा जाता है कि इस क्षेत्र में जो पार्टी बेहतर प्रदर्शन करती है वही भोपाल की गद्दी पर बैठती है. परंपरागत रूप से यह क्षेत्र भाजपा और संघ का गढ़ रहा है, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में वोट बैंक दरकने से कांग्रेस ने बाजी मार ली थी. इस क्षेत्र में मिली शानदार जीत ने कांग्रेस को राज्य में सत्ता हासिल करवा दी. लेकिन अब भाजपा और संघ इस क्षेत्र को साधने में जुट गए हैं. खुद संघ प्रमुख मोहन भागवत इस क्षेत्र के लिए खास रणनीति बनाने में लगे हैं.

मालवा-निमाड़ में हैं इतनी सीटें
कुल 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा की 66 सीटें मालवा-निमाड़ क्षेत्र में हैं. इस क्षेत्र में 15 जिले और 2 संभाग आते हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 55 सीटों पर कब्जा जमाया था, लेकिन बीते विधानसभा चुनाव में उसकी सीटों की संख्या घटकर 27 हो गई. इसके उलट 2013 में कांग्रेस को इस क्षेत्र में 9 सीटें मिली थीं जो बीते चुनाव में बढ़कर 35 हो गई. यानी इस इलाके में भाजपा को 28 सीटों का नुकसान हुआ जबकि कांग्रेस को 26 सीटों का फायदा हुआ. माना जा रहा है कि यदि लोकसभा चुनाव में भी जनता भाजपा के साथ ऐसा ही बेरुखा व्यवहार करती है तो नतीजे गड़बड़ा जाएंगे. ऐसे में खुद संघ प्रमुख को पहल करनी पड़ी है.

यूपी की 80 नहीं केवल इतनी सीटों पर फोकस करेगी कांग्रेस, जानें क्या है पार्टी की रणनीति

आज से तीन दिन यहीं रहेंगे भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को सुबह यहां पहुंचे. पश्चिमी मध्यप्रदेश के मालवा अंचल में अपने तीन दिवसीय प्रवास के दौरान वह संघ की आंतरिक बैठकों में हिस्सा लेकर संगठन के स्वयंसेवकों से संवाद करेंगे. प्रदेश में गत नवंबर में संपन्न विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार और अप्रैल-मई में प्रस्तावित लोकसभा चुनावों की उल्टी गिनती शुरू होने के मद्देनजर संघ प्रमुख के दौरे पर सियासी विश्लेषकों की निगाहें भी टिकी हैं. हालांकि, संघ के सूत्रों का कहना है कि भागवत “पहले से तय नियमित कार्यक्रम” के तहत मालवा क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे हैं.

उन्होंने बताया कि भागवत अपने इस तीन दिवसीय प्रवास के दौरान संघ परिवार के विभिन्न संगठनों के क्षेत्रीय पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों को मार्गदर्शन देंगे. वह संघ के गठनायकों (मोहल्ला स्तर पर कार्य करने वाले कार्यकर्ता) से भी संवाद करेंगे. सूत्रों ने भागवत के कार्यक्रमों का विस्तृत ब्योरा दिये बगैर बताया कि ये संघ के नितांत आंतरिक आयोजन हैं और इनमें संगठन के संबंधित पदाधिकारी तथा स्वयंसेवक ही हिस्सा ले सकेंगे. उन्होंने बताया कि भागवत के कार्यक्रमों में भाग लेने वाले अधिकतर स्वयंसेवक सूबे के मालवा अंचल (इंदौर और उज्जैन संभाग) के होंगे. यह इलाका संघ का मजबूत गढ़ माना जाता है.

शिवसेना के बाद, बीजेपी-AIADMK गठबंधन का आज हो सकता है एलान, जानें कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा

स्वंयसेवकों से करेंगे संवाद
गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा की पकड़ इस क्षेत्र में ढीली हुई, जबकि कांग्रेस की सीटों में इजाफा हुआ था. भागवत अपने मालवा प्रवास के दौरान किन विषयों पर स्वयंसेवकों से संवाद करेंगे, इसकी जानकारी हालांकि मीडिया से साझा नहीं की गयी है. लेकिन वह ऐसे वक्त स्वयंसेवकों के बीच पहुंचे हैं, जब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ के काफिले पर हालिया आतंकी हमले से देशवासी आक्रोशित हैं. इसके साथ ही, इस सरहदी सूबे को खास दर्जा और इसके स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और 35-ए पर बहस तेज हो गयी है. अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण शुरू करने की मांग भी धार्मिक और सियासी हलकों में तूल पकड़ रही है.