पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग आ गए हैं. मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की कुछ सीटों पर काउंटिंग अभी जारी है. राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ हिंदी बेल्ट के ऐसे राज्य हैं, जहां आज भी राजघराना चर्चा में रहता है. राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे तो राजघराने से ही आती हैं. वहीं, मध्यप्रेदश और छत्तीसगढ़ में सीएम फेस के तौर पर देखे जा रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया और टीएस सिंह देव भी राजघराने से आते हैं. ऐसे में आज भी ये घराने सक्रिय राजनीति में महत्वपूर्ण पदों पर हैं. आइए जानते हैं इन चुनावों में राजघराने के कितने लोगों को मिली जीत…

राजस्थान का धौलपुर राजघराना
वसुंधरा राजे सिंधिया इस राजघराने की बहू बनकर आईं. इससे पहले वह ग्वालियर राजघराने की बहू थीं. वह झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक हैं. इस बार भी उन्होंने मानवेंद्र सिंह को बड़े अंतर से हराया. वह साल 2003 और साल 2013 में सीएम रह चुकी हैं.

मध्यप्रदेश का ग्वालियर राजघराना
यह एक ऐसा राजघराना है जिसके वारिस दो राज्यों में सक्रिय राजनीति में है. वसुंधरा जहां राजस्थान की राजनीति में एक्टिव हैं, वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश में सीएम फेस हैं. खास बात है कि इस राजघराने के वारिस बीजेपी और कांग्रेस दोनों से जुड़े हुए हैं.

राजस्थान का कोटा राजघराना
इज्यराज सिंह की पत्नी कल्पना देवी इस लाड़पुरा सीट से मैदान में थीं. यह राजघराना परंपरागत रूप से कांग्रेस में था. लेकिन इस बार इसने बीजेपी का दामन थाम लिया था.

छत्तीसगढ़ राजघराना
छत्तीसगढ़ में सरगुजा राजघराना अभी भी काफी सक्रिय है. टीएस सिंह देव को सीएम फेस की तरह देखा जा रहा है. पूर्व महाराज रामानुज सारन साल 1951 में विधायक बने थे. उनके बाद उनकी पत्नी मंत्री पद पर रहीं. टीएस सिंह देव साल 2008 से लगातार विधायक हैं.

राघोगढ़ राजघराना
राघोगढ़ राजघराना तीन पीढ़ी से राजनीति में है. दिग्विजय सिंह के पिता लक्ष्मण सिंह कांग्रेस से विधायक थे. इसके बाद दिग्विजय सिंह सीएम तक का सफर तय किए. अब दिग्विजय के बेटे जयवर्धन दो बार से विधायक हैं.