नई दिल्ली: पिछले चार महीने के दौरान मध्य और उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से लगभग दस प्रतिशत अधिक बारिश देने वाले दक्षिण पश्चिम मानसून की बुधवार को लगभग एक महीने विलंब से वापसी शुरु हो गयी. मौसम विभाग ने 20 अक्टूबर तक मानसून की पूरी तरह से वापसी का अनुमान जताया है.

विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार पिछले पांच दिनों से मानसून की लगातार सुस्ती के मद्देनजर उत्तर पश्चिम क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा और उत्तरी राजस्थान से मानसून की आधिकारिक तौर पर वापसी शुरु हो गयी है. भारत में बारिश के मौसम के लिये जिम्मेदार दक्षिण पश्चिम मानसून की सामान्य तौर पर हर साल एक सितंबर को वापसी शुरुआत हो जाती है और 30 सितंबर तक यह पूरी तरह लौट जाता है. विभाग के अनुसार इस साल मानसून की सबसे अधिक विलंब से वापसी शुरु हुयी है. इससे पहले 1961 में एक अक्टूबर को मानसून की वापसी शुरु हुयी थी जबकि 2007 में 30 सितंबर और 2018 में 29 सितंबर को मानसून की वापसी शुरु हुयी थी.

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पंजाब के कपूरथला से हुई मानसून वापसी की शुरुआत
विभाग के अनुसार मानसून की इस साल वापसी की शुरुआत पंजाब के कपूरथला, हरियाणा के अंबाला और करनाल तथा राजस्थान के चुरु से हुई है. उत्तर और मध्य भारत में हवा के कम दबाव का क्षेत्र कमजोर पड़ने के कारण अगले दो दिनों में मानसून की इन इलाकों से भी वापसी शुरु हो जायेगी. विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मानसून की मौजूदा गतिविधि को देखते हुये दक्षिण पश्चिम मानसून की 20 अक्टूबर तक पूरी तरह से वापसी संभावित है.

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जुलाई, अगस्त और सितबंर में मानसून की जमकर बारिश
उन्होंने बताया कि दक्षिणी प्रायदीप क्षेत्र में बारिश देने वाला उत्तर पूर्वी मानसून 15 से 20 अक्टूबर के बीच की दस्तक देता है. दक्षिण पश्चिम मानसून के विलंबित होने के कारण उत्तर पूर्वी मानसून की गति पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उल्लेखनीय है कि दक्षिण पश्चिम के शुरुआती चरण में अल नीनो के प्रभाव के कारण जून में सामान्य से 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गयी. लेकिन जुलाई, अगस्त और सितबंर में मानसून की जमकर बारिश हुयी और इसका स्तर सामान्य से दस प्रतिशत की अधिकता को पार कर गया. इसके परिणामस्वरूप देश के सभी जलाशयों में इस साल रिकार्ड तोड़ जल संचय हुआ है. (इनपुट एजेंसी)

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