नई दिल्ली: संसद के आज से शुरू हो रहे मानसून सत्र के दौरान जहां विपक्ष ने दोनों सदनों में सामान्य कामकाज होने का भरोसा जताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाये, वहीं सत्ता पक्ष के सदस्यों ने उम्मीद जतायी कि सत्र में लोकहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा होगी. सत्र के पहले दिन तेलुगू देशम पार्टी और कांंग्रेस ने राजग सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया. उन्होंने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तारीख बाद में बताएंगी. तेलुगू देशम पार्टी ने आंंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर सदन में हंगामा किया, जिसके चलते राज्यसभा को 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा.  इधर, पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि संसद के सुचारू संचालन के लिए सरकार हर मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है.

महिला आरक्षण और भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या करने के मामलों (मॉब लिंचिंग) में बढ़ोतरी जैसे मुद्दों को इस सत्र में उठाये जाने की संभावनाओं के बीच विपक्षी दलों ने सत्तापक्ष को सदन की अबाध कार्यवाही का आश्वासन दिलाया. राजद के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा ‘‘विपक्ष सदन की सुचारू कार्यवाही सुनिश्चित करने में सकारात्मक सहयोग के लिये तत्पर है, लेकिन सत्तापक्ष की मंशा पर संदेह है.’’ झा ने कहा ‘‘मॉब लिंचिंग का मामला हो या महिला आरक्षण का मुद्दा, सत्तापक्ष का इरादा कुछ और है, इशारा कुछ और है.’’

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भाजपा की राज्यसभा सदस्य रूपा गांगुली ने भी सदन की कार्यवाही सुचारू रुप से चलने की उम्मीद जताते हुये कहा कि जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक बहस में विपक्ष को सहयोग करना चाहिये. महिला आरक्षण के मुद्दे पर गांगुली ने कहा ‘‘मेरी निजी राय है कि आज के दौर में महिलाओं को आरक्षण की उतनी जरूरत नहीं है जितनी पुराने समय में थी. लेकिन कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें आजादी के इतने साल बाद भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं हो पाया है, उन क्षेत्रों में आरक्षण की जरूरत है.’’ उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जो सवाल उठाये हैं, उनकी पार्टी की जिम्मेदारी थी कि तमाम क्षेत्रों में महिलाओं को आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया.

पूर्व सपा नेता और असंबद्ध सदस्य अमर सिंह ने विपक्ष के रुख का हवाला देते हुये सदन की कार्यवाही ग्रीष्मकालीन सत्र की तरह मानसून सत्र में भी बाधित रहने की आशंका जतायी. उन्होंने कहा ‘‘पहले गर्मी से संसद झुलसी थी अब मानसून में भीगेगी. विपक्ष का काम ही यही है कि कामकाज न हो.’’ महिला आरक्षण के मुद्दे पर सिंह ने कहा कि यह विधेयक पारित होना चाहिये क्योंकि इस विधेयक पर सुषमा स्वराज से लेकर वृंदा करात तक सभी के बीच सहमति है. हालांकि, उन्होंने महिला आरक्षण पर विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुये कहा ‘‘जो धर्मनिरपेक्ष बिरादरी है उसके प्रणेता, चाहे मायावती की पार्टी हो या अखिलेश और लालू जी की पार्टी हो, ये लोग इसके प्रबल विरोधी हैं. विधेयक पारित नहीं होने देने वालों का जखीरा विपक्षी खेमे में ही है.’’

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कांग्रेस के हुसैन दलवई ने विपक्ष की ओर से सदन की सुचारू कार्यवाही में सक्रिय सहयोग का भरोसा दिलाते हुये उम्मीद जतायी कि विपक्ष को भी उसकी बात रखने का मौका दिया जाएगा. मॉब लिंचिंग का मुद्दा सदन में उठाये जाने के सवाल पर दलवई ने सत्तापक्ष की मंशा पर संदेह जताते हुये कहा ‘‘सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हम आदर करते हैं लेकिन मौजूदा कानून को ही अगर ठीक ढंग से लागू किया जाये तो अलग कानून का सवाल उठेगा ही नहीं.’’ उन्होंने कहा कि कानून बनने के बावजूद अगर सरकार लिंचिंग करने वालों की अगर मदद करेगी तो कानून बनाने से क्या फायदा होगा.

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इधर मानसून सत्र में सुचारू कामकाज सुनिश्चित करने में राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सरकार किसी भी दल, किसी भी सदस्य द्वारा उठाये गए किसी भी विषय पर चर्चा को तैयार है. मानसूत्र सत्र शुरू होने से पहने प्रधानमंत्री ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि इस सत्र में देशहित के कई महत्वपूर्ण मसलों पर निर्णय होने जरूरी हैं. देश के कई महत्वपूर्ण मसलों पर चर्चा जरूरी है और जितनी व्यापक चर्चा होगी, सभी वरिष्ठ अनुभवी लोगों का सदन को मार्गदर्शन मिलेगा. उन्होंने कहा कि इससे देश को लाभ होगा और सरकार को भी अपनी निर्णय प्रक्रिया में अच्छे सुझावों से फायदा होगा.

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मोदी ने कहा, ‘‘ मैं आशा करता हूं कि सभी राजनीतिक दल सदन के समय का सर्वाधिक उपयोग देश के महत्वपूर्ण कार्यो को आगे बढ़ाने में करेंगे.’’ उन्होंने जोर दिया कि कोई भी दल, कोई भी सदस्य किसी भी विषय पर चर्चा करना चाहे तो सरकार उसके लिये तैयार है ।

संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हुआ है और यह 10 अगस्त तक चलेगा. सरकार इस सत्र के दौरान तीन तलाक संबंधी विधेयक, भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक, पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा संबंधी विधेयक, बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के मामलों में सख्त दंड के प्रावधान वाला विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराना चाहती है. वहीं विपक्ष, जम्मू कश्मीर की स्थिति, किसानों की समस्या, महंगाई, पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतें, डालर के मुकाबले रूपये की कीमतों में गिरावट, भीड़ द्वारा लोगों को पीट पीट कर हत्या के मामलों समेत कई अन्य विषयों पर सरकार को घेरने का प्रयास करेगी.