नई दिल्ली: मोदी सरकार के जॉब पोर्टल पर एक करोड़ से ज्यादा बेरोजगारों ने नौकरी की गुहार लगाई है. इसके जवाब में अब तक मोदी सरकार ने 67.99 लाख नौकरियों की सूचना पोर्टल पर दी है. इनमें से कितनी नौकरियां पंजीकृत बेरोजगारों को मिलीं, इसका आंकड़ा सरकार के पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है. Also Read - लॉकडाउन में खेती-किसानी को छूट, खुली रहेंगी ट्रकों की गैरेज, कृषि मशीनरी की दुकानें

श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार पूर्व में लोकसभा में हुए एक सवाल के जवाब में स्पष्ट कर चुके हैं कि नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) पोर्टल के जरिए कितने लोगों को नौकरी मिली, इसके आंकड़े नहीं रखे जाते, बल्कि इस पोर्टल पर रजिस्टर्ड वैकेंसी और पंजीकृत बेरोजगारों से जुड़े आंकड़े रहते हैं. Also Read - पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों पर पत्थर फेंके जाने से दुखी हैं एथलीट हिमा दास, PM को बताया

मोदी सरकार ने नौकरियों के लिए दर-दर भटकने वाले बेरोजगारों और अच्छे कर्मचारियों की तलाश में लगे संस्थानों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए 2015 में खास पहल की थी. इसके लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने नेशनल करियर सर्विस पोर्टल का प्लेटफॉर्म लांच किया था. यह ऐसा पोर्टल है, जिस पर बेरोजगार अपनी शैक्षिक आदि योग्यता की जानकारी देते हुए प्रोफाइल बना सकते हैं. वहीं नौकरी देने वाली कंपनियां भी यहां रजिस्ट्रेशन कराती हैं. कोई भी पंजीकृत बेरोजगार क्लिक कर अपने लायक उपलब्ध नौकरियों और संस्थानों की जानकारी ले सकता है. Also Read - प्रधानमंत्री मोदी से मीटिंग में सचिन ने उठाया अहम मुद्दा, 'लॉकडाउन के बाद हमें करना होगा ये काम'

वर्ष 2015 से अगर अब तक इस पोर्टल पर नजर डालें तो दावेदारों की तुलना में नौकरियों के सृजन की स्थिति संतोषजनक नहीं है. पोर्टल बनने के पहले साल यानी 2015-16 में कुल एक लाख 47 हजार 780 नौकरियों की सूचना इस पोर्टल पर जारी की गई. जबकि उस साल 32 लाख 32 हजार 916 बेरोजगारों ने नौकरी मांगी. पहले साल नौकरी देने वालीं सिर्फ 559 कंपनियां इस पोर्टल से जुड़ीं.

अगले साल पोर्टल के बारे में और जानकारी हुई तो बेरोजगारों की संख्या बढ़नी शुरू हुई. 2016-17 में 1433075 वैंकेसी जारी हुईं, वहीं बेरोजगारों की तादाद बढ़कर 44,73,989 हो गई. इसी तरह 2017-18 में जहां 5251432 बेरोजगारों ने नौकरी मांगी, वहीं उनके लिए 23,54,047 नौकरियां उपलब्ध रहीं. 2018-19 में बेरोजगारों का आंकड़ा 85,41,273 तक पहुंच गया, जबकि नौकरियों का आंकड़ा 40,41,848 ही रहा. वहीं 2019-20 में बेरोजगारों का आंकड़ा एक करोड़ नौ लाख 87 हजार 331 हो गया, जबकि नौकरियों की संख्या 67,99,117 रही.

अगर एक्टिव जॉब सीकर्स और एक्टिव वैंकेसीज की बात करें तो हालत और भी खराब है. इस वक्त एक करोड़ चार लाख 54 हजार 808 बेरोजगार हैं, जिनके लिए सिर्फ तीन लाख 26 हजार 308 वैंकेंसीज उपलब्ध उपलब्ध हैं.

अगर नौकरी उपलब्धता की बात करें, तो कर्नाटक में सर्वाधिक 45,764 नौकरियां उपलब्ध हैं तो महाराष्ट्र 42,506 नौकरियों के साथ दूसरे स्थान पर है. पश्चिम बंगाल में 40,417, उत्तर प्रदेश में 30,428, गुजरात में 20,081, मध्य प्रदेश में 13,739 नौकरियां इस पोर्टल पर उपलब्ध हैं. जम्मू-कश्मीर में 274 नौकरियां हैं. फिलहाल तीन लाख से ज्यादा उपलब्ध जॉब में महज 21,334 सरकारी नौकरियां हैं, वहीं 23,010 रिटायर्ड सैनिकों के लिए, वहीं मात्र 4986 नौकरियां महिलाओं के लिए हैं. दिव्यांग लोगों के लिए 208, अप्रेंटिसशिप के लिए 347 हैं.

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “नेशनल करियर सर्विस प्लेटफॉर्म के जरिए बेरोजगारों को समय से उनके लायक सरकारी और प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों की सूचना दी जाती है. इस महत्वाकांक्षी पोर्टल को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. कंपनियों को भी पोर्टल से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है. यही वजह है कि समय के साथ बेरोजगारों का रजिस्ट्रेशन और नौकरियों की सूचना इस पोर्टल पर बढ़ी है.”