
Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
चुनाव आयोग की तरफ से चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दूसरे चरण में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. बीते कुछ दिनों में पब्लिश 9 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से करीब 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. दूसरे चरण की शुरुआत से पहले इन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 50.90 करोड़ मतदाता दर्ज थे, लेकिन नई ड्राफ्ट सूचियां जारी होने के बाद यह संख्या घटकर 44.40 करोड़ रह गई है.
चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें ‘ASD’ श्रेणी में रखा गया है. ASD का मतलब है Absent (अनुपस्थित), Shifted (स्थानांतरित) और Dead/Duplicate (मृत या डुप्लीकेट). यानी ये नाम या तो मतदान क्षेत्र में मौजूद नहीं पाए गए, स्थायी रूप से कहीं और चले गए, उनकी मृत्यु हो चुकी है या फिर एक से अधिक जगह पंजीकरण पाया गया.
आयोग ने यह भी बताया कि उपलब्ध रुझानों के अनुसार शहरी इलाकों में गणना फॉर्म (Enumeration Forms) जमा होने की रफ्तार ग्रामीण इलाकों के मुकाबले काफी कम रही. इसका असर ड्राफ्ट सूची पर साफ दिखा. उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश की बात करें तो SIR के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल नहीं किए गए, जबकि 12.55 करोड़ मतदाता सूची में बने रहे. यानी पहले सूचीबद्ध 15.44 करोड़ मतदाताओं में से करीब 18.70 प्रतिशत नाम हटाए गए, जिनका कारण मृत्यु, स्थायी पलायन या एक से ज्यादा जगह नाम दर्ज होना बताया गया है.
SIR का दूसरा चरण 4 नवंबर से अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ. वहीं, असम में मतदाता सूची का एक अलग ‘स्पेशल रिवीजन’ जारी है. आयोग ने स्पष्ट किया कि राज्यों में हुआ पिछला SIR ही कट-ऑफ माना जाएगा, जैसे बिहार में 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाकर गहन पुनरीक्षण किया गया था. ज्यादातर राज्यों में आखिरी SIR 2002 से 2004 के बीच हुआ था.
चुनाव आयोग का कहना है कि इस पूरे अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अवैध विदेशी प्रवासियों की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची से हटाना है. जन्म स्थान की जांच के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मतदाता सूची में सिर्फ योग्य भारतीय नागरिकों के नाम ही रहें. बांग्लादेश और म्यांमार समेत अन्य देशों से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में चल रही कार्रवाई के बीच यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है. चुनाव आयोग का दावा है कि इससे मतदाता सूची अधिक शुद्ध, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी.
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