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मुंबई। मुंबई आतंकी हमले के समय जीवित बचे यहूदी बच्चे मोशे के दादा रब्बी नैचमैन होल्त्जबर्ग ने आज कहा कि पाकिस्तान को आतंकवादी पैदा करने की अपनी नीति पर फिर से गौर करना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रेम और लगाव का प्रसार करना इस दुनिया में ‘एकमात्र विजय’ है. Also Read - आर्थिक गलियारे का एक चौथाई काम भी नहीं हुआ है पूरा, क्यों चीन के आगे लाचार है पाकिस्तान?

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होल्त्जबर्ग ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान को यह बेहतर ढंग से जानना चाहिए कि लोग किस चीज का सामना कर रहे हैं. पिता, भाई, पत्नी और बच्चे के दुखों को देखना चाहिए. पाकिस्तान से आए 10 आतंकवादियों ने 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में कई स्थानों पर हमला किया था. इनमें एक स्थान नरीमन हाउस (चबाड हाउस) भी था. 

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नरीमन हाउस के हमले में होल्त्जबर्ग के बेटे गैवरिएल और बहू रिवका की मौत हो गई थी. इस हमले में उनका पौत्र मोशे जिंदा बच गया था जो हमले के समय दो साल का था. होल्त्जबर्ग ने कहा कि पाकिस्तान लोगों को खासकर बच्चों को आतंकवादी बनने की ‘शिक्षा दे रहा है’ और आतंक की गतिविधियों को विजय नहीं कहा जा सकता. अच्छाई और दयालुता का संदेश फैलाने में ही विजय है.