नई दिल्ली, 20 सितम्बर। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि स्वतंत्रता के बाद अधिकांश सरकारी भवनों एवं संस्थानों के नाम केवल एक परिवार के लोगों के नाम पर रखे गए, जबकि अन्य लोग भी हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान किया है। नायडू ने यह टिप्पणी ‘पर्यावरण भवन’ का पुनर्नामकरण कर ‘दीनदयाल अंत्योदय भवन’ करने के अवसर पर की। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जनसंघ के विचारक थे। नायडू ने कहा कि इससे कोई इनकार नहीं है कि नेहरू महान स्वतंत्रता सेनानी थे, लेकिन सरदार पटेल भी महान स्वतंत्रता सेनानी थे और इसी तरह अशफाकुल्ला खान भी थे। लेकिन उनके नाम पर बहुत सरकारी भवन और संस्थान नहीं हैं।

नायडू के साथ अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इस भवन की नई नाम पट्टिका का अनावरण किया। इस भवन में अन्य सरकारी कार्यालयों के अलावा अल्पसंख्यक मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय एवं विकलांगता के शिकार लोगों के सशक्तीकरण विभाग के दफ्तर हैं। इससे पहले इस भवन के अधिकांश हिस्से में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय था, लेकिन वर्ष 2014 के जून में यह मंत्रालय नए भवन में चला गया। नायडू ने कहा कि इस भवन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर करना बिल्कुल उचित है, क्योंकि यह पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन को प्रदर्शित करता है। उपाध्याय ने सबसे गरीब और सर्वाधिक वंचितों का जीवन स्तर उठाने की वकालत की थी। यह भी पढ़े-केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने की स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 27 स्मार्ट सिटी की घोषणा

अंत्योदय का अर्थ पंक्ति में खड़े सबसे आखिरी व्यक्ति का, सबसे कमजोर का कल्याण। पंडित उपाध्याय ने ‘समेकित मानवतावाद’ के दर्शन का प्रचार किया था, जो संस्था बनी और जिसने तन-मन से समाजवाद एवं पूंजीवाद से सामंजस्य स्थापित किया। उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी की इस साल जन्म शताब्दी है। यह बिल्कुल उचित था कि राष्ट्रीय राजधानी में एक महत्वपूर्ण भवन का नामकरण उनके नाम पर किया जाए। इससे पहले नकवी ने इस अवसर पर आने की कृपा करने के लिए नायडू को धन्यवाद दिया।