छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए दो चरणों में वोटिंग हो चुकी है और 11 दिसंबर का इंतजार है. मंगलवार को रमन सिंह की सरकार एक बार फिर प्रदेश की सत्ता में रहेगी या नहीं इसका फैसला हो जाएगा. इस बीच कांग्रेस भी सत्ता में वापसी का दावा कर रही है. एग्जिट पोल आ चुके हैं और इसमें भी राज्य में किसकी सरकार बनेगी इसपर असमंजस की ही स्थिति बनी हुई है. प्रदेश में किसकी सरकार आएगी ये तो सवाल है ही, लेकिन राज्य की 5 ऐसी सीटें भी हैं जिनपर सबकी नजर रहेगी. आइए जानते हैं इन सीटों के बारे में… Also Read - छत्तीसगढ़: आप संयोजक संकेत ठाकुर ने ली हार की जिम्मेदारी, दिया इस्तीफा

राजनांदगांव
यह सीट सीएम रमन सिंह की परंपरागत सीट के रूप में जानी जाती है. रमन सिंह सीएम होने के साथ-साथ राज्य में बीजेपी का चेहरा हैं. वह बीजेपी की तरफ से सबसे ज्यादा दिन मुख्यमंत्री रहने वाले शख्स हैं. इस बार फिर वह सीएम बनेंगे तो ये भी एक नया रिकॉर्ड ही रहेगा. लेकिन इस बार उन्हें अपनी विधानसभा सीट पर ही चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. उनके खिलाफ कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला को मैदान में उतारा है. करुणा वाजपेयी के अस्थि कलश के अपमान के मुद्दे के साथ मैदान में हैं. ऐसे में ये सीट काफी चर्चा में है. Also Read - शराब की वजह से नॉर्थ ईस्ट में ढह गया कांग्रेस का आखिरी किला?

अंबिकापुर
यहां नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंह देव का सीधा मुकाबला बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग सिंह देव से है. टीएस इस सीट से दो बार से लगातार चुनाव जीत रहे हैं. हालांकि, इसके पहले टीएस सिंह देव दो बार अनुराग सिंह को हरा चुके हैं. लेकिन हर बार अनुराग सिंह ज्यादा मजबूती से मैदान में उतरते रहे हैं. देव को सीएम फेस के तौर पर भी देखा जा रहा है. ऐसे में यह सीट काफी महत्वपूर्ण हो गई है. Also Read - जानिए, जब 11 दिसंबर को हार रही थी बीजेपी, तब क्या कर रहे थे पीएम नरेंद्र मोदी

दंतेवाड़ा
झीरम घाटी कांड के बाद यह इलाका पूरे भारत में चर्चित हो गया था. इस बार फिर यहां से महेंद्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा चुनाव लड़ रही हैं. बीजेपी ने भी इस बार महिला उम्मीदवार भीमा मंडावी को चुनाव मैदान में उतारा है. हालांकि, यह सीट महेंद्र कर्मा का एक मजबूत किला माना जाता रहा है, लेकिन सीपीआई के नंदाराम सोरी ने मुकाबला दिलचस्प कर दिया है. साल 2013 के बाद से हर दिन बस्तर की सियासी तस्वीर बदली है. ऐसे में यह चुनाव काफी हलचल पैदा करने वाला रहा है.

बीजापुर सीट
यह सीट नक्सली हमलों की वजह से काफी चर्चा में रही है. बीजेपी यहां से लगातार दो बार साल 2008 और 2013 से जीत रही है. बीजेपी की नजह जहां तीसरी जीत की है, वहीं कांग्रेस यहां वापसी करने की उम्मीद लगाए हुई है. बीजेपी ने जहां महेश गगड़ा पर एक बार फिर भरोसा जताया है तो दूसरी तरफ वह भीतरघात से भी जूझ रही है. पीएम मोदी ने आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत यहीं से की थी.

कोंटा सीट
बस्तर की इस सीट को कांग्रेस की परंपरागत सीट के तौर पर देखा जाता है. आदिवासी बाहुल और नक्सल प्रभावित इस सीट पर कांग्रेस की मजबूत पकड़ है और यह सीट उन आधारों का तोड़ती है, जिसमें कहा जाता है कि नक्सली कांग्रेस को वोट नहीं देते हैं. कवासी लखमा यहां से साल 2003 से लगातार जीतते आ रहे हैं. बीजेपी ने इस बार धनीराम बरसे को मैदान में उतारा है.