नई दिल्‍ली: मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने पीएम नरेंद्र मोदी से नई दिल्‍ली में शिष्टाचार मुलाकात ऐसे वक्त में की है, जब उनके करीबियों पर माए गए इनकम टैक्‍स छापे के दौरान करीब 281 करोड़ रुपए की बेनामी नकदी के लेन-देन से संबंधित कागजात मिलने के मामले में सीबीआई जांच की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं. वहीं, लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व से लेकर पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता भयंकर सदमे में हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर मुलाकात की. पीएम मोदी के 30 मई को दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण करने के बाद मोदी और कमलनाथ के बीच यह पहली मुलाकात है. Also Read - World Wildlife Day: PM Modi ने पर्यावरण के लिए काम करने वालों की सराहना की, कही ये बात

कमलनाथ ने पीएम मोदी के साथ हुई मुलाकात की फोटो टि्वटर पर शेयर की है. बता दें कि कमलनाथ ने दिसंबर में मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. लेकिन लोकसभा चुनाव के परिणाम कांग्रेस के लिए बेहद निराशाजनक रहे. सिर्फ कमलनाथ के संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा से उनके बेटे नकुलनाथ महज 30 हजार वोटों से ही अपनी सीट बचा पाए. लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस नेतृत्‍व, पार्टी नेता और कार्यकर्ता सभी सदमें में हैं, हार के कारणों की समीक्ष चल रही है. ऐसे में कमलनाथ दिल्‍ली पहुंच कर अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं से तो मिलेंगे ही लेकिन प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात को लेकर सियासी गलियारों में उठ रहे कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं. Also Read - PM Narendra Modi Reaction After Vaccination: वैक्सीन लगाने के बाद पीएम ने दिया ये रिएक्शन- लगा भी दिया...

मध्‍य प्रदेश में स्‍पष्‍ट बहुमत के अभाव में कांग्रेस निर्दलीय, सपा के एक विधायक और बसपा के दो विधायकों के समर्थन सरकार चला रहा है. सरकार बहुमत को लेकर बीजेपी के नेता शुरुआत से खूब बयान देते हैं. दरअसल, मध्‍य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 114 सीटें, बीजेपी ने 109 सीटें जीती थी.

पहले माना जा रहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में आने के बाद बीजेपी कांग्रेस, निर्दलीय, सपा, बसपा के विधायकों को अपने पाले में करके सरकार गिरा सकती है. लेकिन बीजेपी के नेताओं के ताजा बयानों से ऐसा लग रहा है कि पार्टी  कमलनाथ की सरकार के स्‍वत: गिरने का इंतजार करना चाहती है. बीजेपी हाईकमान लोकसभा चुनावों के बाद मिली भारी सफलता के मद्देनजर मध्‍य प्रदेश में अपनी पार्टी की एक मजबूत सरकार देखना चाहेगी बजाए इसके कि उसे बाहरी विधायकों की बैसाखी का सहारा लेना पड़े.

वहीं, बीते दिनों से खबरें आ रही हैं कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी सहयोगियों और अन्य के घरों पर अप्रैल में इनकम टैक्‍स विभाग के छापे के दौरान करीब 281 करोड़ रुपए बेनामी नकदी के मामले में सीबीआई जांच की संभावनाएं बढ़ गई हैं. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने बताया था कि मध्यप्रदेश में तलाशी में कारोबार, राजनीति और लोकसेवा सहित विभिन्न क्षेत्र से जुड़े लोगों की 281 करोड़ रुपए बेनामी नकदी के सुनियोजित गिरोह का पता चला है.

सीबीडीटी ने कहा कि नकदी का एक हिस्सा दिल्ली में बड़े राजनीतिक दल के मुख्यालय तक भेजा गया. इसमें वह 20 करोड़ रुपए भी शामिल हैं, जो हाल में हवाला के जरिए दिल्ली के तुगलक रोड पर रहने वाले वरिष्ठ पदाधिकारी के घर से राजनीतिक दल के मुख्यालय पहुंचाए गए. हालांकि, सीबीडीटी ने न तो किसी राजनीतिक की और न ही वरिष्ठ पदाधिकारी की पहचान का खुलासा किया है.

बता दें कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) से एक रिपोर्ट मिलने के बाद चुनाव आयोग ने इस मामले में जांच की मांग के लिए सरकार को पत्र लिखा था. कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने आवश्यक कार्रवाई के लिए इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पास भेज दिया था. लेकिन जांच एजेंसी भविष्य की कार्रवाई पर चुप्पी साधे है और पुष्टि भी नहीं की है क्या उसे शिकायत मिली है या नहीं. हालांकि, सरकार के सूत्रों ने बताया कि सीबीआई को शिकायत मिली है और शुरुआती आरोपों की पुष्टि की जा रही है. ऐसे में देखना होगा कमलनाथ की पीएम मोदी के बीच हुई ये सौजन्‍य भेट कितनी सार्थक होती है. (इनपुट: एजेंसी)