नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बार-बार साफ करने के बाद भी दुकानदारों के अलावा अन्य लोगों द्वारा 10 रुपए के सिक्के नहीं लेने के मामले सामने आते रहते हैं. गुरुवार को यह मामला संसद में उठा. राष्ट्रीय जनता दल के सांसद जयप्रकाश नारायण यादव ने लोकसभा में शून्य काल के दौरान इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने कहा कि बिहार और झारखंड में कई जगहों पर 10 रुपये के सिक्कों को स्वीकार नहीं किया जा रहा है. हालांकि यह केवल इन दो राज्यों की समस्या नहीं है. अधिकांश जगहों पर लोग 10 रुपए के सिक्के लेने से मना कर देते हैं.

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हालांकि रिजर्व बैंक ने कुछ व्यापारियों के सिक्के लेने से मना करने की शिकायतों के मद्देनजर कई बार निर्देश जारी कर चुका है कि 10 रुपये के सिक्के के सभी 14 डिजाइन वैध हैं. रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा, ‘रिजर्व बैंक के संज्ञान में यह आया है कि असली-नकली के संदेह के कारण कई जगहों पर लोग व व्यापारी 10 रुपये के सिक्के लेने से मना कर दे रहे हैं.

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रिजर्व बैंक ने कहा कि वह चलन में सिर्फ उन्हीं सिक्कों को लाता है जो सरकारी टकसाल में ढाले जाते हैं. इन सिक्कों में अलग फीचर्स हैं ताकि ये आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित कर सकें और इन्हें समय-समय पर पेश किया गया है. केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘अभी तक 10 रुपये के सिक्के के 14 अलग डिजाइन पेश किए गए हैं. ये सभी सिक्के वैध हैं और लेन-देन के लिए स्वीकारे जाने योग्य हैं. रिजर्व बैंक ने बैंकों को भी अपनी सभी शाखाओं में लेन-देन के लिए सिक्के स्वीकृत करने के लिए कहा है.

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एक दुकानदार की ओर से 10 रुपए का सिक्का नहीं लेने पर इसी साल अगस्त महीने में मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक स्थानीय अदालत ने जुर्माने के साथ ही सजा सुनाई थी. जिले में जौरा के न्यायिक मैजिस्ट्रेट जेपी चिडार की अदालत ने एक दुकानदार अरुण जैन को सामान के बदले ग्राहक से 10 रुपये के सिक्के लेने से इनकार करने का दोषी ठहराया था. न्यायालय ने आरोपी दुकानदार को अदालत उठने तक की सजा और 200 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया था.