MP में परिवहन क्रांति की तैयारी! इंदौर से दौड़ेंगी 1688 बसें, 150 इलेक्ट्रिक बसों के साथ शुरू होगी 'CM सुगम परिवहन सेवा'
मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत इंदौर से करने का फैसला लिया है. नई योजना के तहत इंटरसिटी, सिटी और अंतरराज्यीय बसों का बड़ा नेटवर्क तैयार होगा, जिससे लाखों यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में बैठक.
MP Sugam Parivahan Seva: मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' को लेकर कई अहम फैसले लिए गए. इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत इंदौर संभाग से होगी, जहां इंटरसिटी, सिटी और अंतरराज्यीय बस सेवाओं का व्यापक नेटवर्क तैयार किया जाएगा.
राज्य सरकार की योजना के अनुसार मध्य प्रदेश को सात परिवहन क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा. इनमें इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, जबलपुर और रीवा शामिल हैं. इन क्षेत्रों के माध्यम से प्रदेशभर में संगठित और सुव्यवस्थित बस सेवा विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है.
इंदौर को मॉडल क्षेत्र के रूप में चुना गया
योजना के पहले चरण में इंदौर को मॉडल क्षेत्र के रूप में चुना गया है. इंदौर से प्रदेश के विभिन्न जिलों को जोड़ने वाले 121 इंटरसिटी मार्ग चिन्हित किए गए हैं, जिन पर 608 बसों का संचालन किया जाएगा. इसके अलावा शहर और आसपास के उपनगरीय क्षेत्रों के लिए 28 सिटी रूट निर्धारित किए गए हैं. इन मार्गों पर कुल 784 बसें चलेंगी, जिनमें प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत मिलने वाली 150 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल होंगी.
इंदौर से पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लिए भी बस सेवाएं संचालित की जाएंगी. इसके लिए 101 अंतरराज्यीय मार्ग तय किए गए हैं, जिन पर 276 बसों का संचालन प्रस्तावित है. इस प्रकार इंदौर क्षेत्र से कुल 250 मार्गों पर 1688 बसें संचालित की जाएंगी. सरकार का मानना है कि इस योजना से यात्रियों को सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध होगा. खास बात ये है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और शहरों में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी.
कुल 1164 मार्गों की पहचान की गई
पूरे प्रदेश की बात करें तो सातों क्षेत्रों में कुल 1164 मार्गों की पहचान की गई है. इन मार्गों पर लगभग 5206 बसें संचालित करने की योजना बनाई गई है. इससे प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों, जिला मुख्यालयों और महत्वपूर्ण कस्बों के बीच संपर्क बेहतर होगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई परिवहन व्यवस्था का निजी बस संचालकों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा. वर्तमान में जिन निजी बसों के पास वैध परमिट हैं, वे पहले की तरह संचालित होती रहेंगी. नई सेवा मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार लागू की जाएगी.
बैठक में परिवहन व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी और सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के गठन को भी मंजूरी दी गई. इन संस्थाओं के माध्यम से परिवहन सेवाओं की निगरानी, तकनीकी संचालन, गुणवत्ता नियंत्रण और यात्री सुविधाओं का प्रबंधन किया जाएगा. इसके अलावा विभिन्न विभागों में कुल 1190 नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी गई है. इन पदों को अगले चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा. इससे परिवहन क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बस सेवाओं के साथ यात्रियों के लिए बस स्टैंड, प्रतीक्षालय और अन्य सुविधाओं को भी व्यवस्थित किया जाए. उनका कहना है कि योजना का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को बेहतर और भरोसेमंद परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है. अगर योजना तय समय पर लागू होती है, तो यह मध्य प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें