नई दिल्लीः भाजपा के राज्यसभा सांसद विनय कटियार ने मुसलमानों को लेकर विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को इस देश में रहना ही नहीं चाहिए. उन्होंने जनसंख्या के आधार पर देश का बंटवारा कर दिया तो इस देश में रहने की क्या आवश्यकता है? उनको अलग भू-भाग दे दिया गया. दरअसल, एआईएमआईएम सांसद असादुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को लोकसभा में कहा था कि भारतीय मुसलमानों के हक में एक बनाया जाना चाहिए जिसमें भारतीय मुसलमान को पाकिस्तानी कहने पर दोषी व्यक्ति को तीन साल की सजा होनी चाहिए. कटियार ने ओवैसी के इसी बयान पर पलटवार करते हुए विवादित टिप्पणी की. Also Read - Viral Video: पाकिस्तान में अनोखी शादी, दूल्हे को गिफ्ट में दी AK 47, लोग बोले- गरीब देश के अमीर...

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कटियार ने कहा कि मुसलमानों को बांग्लादेश या पाकिस्तान चले जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि ऐसा कानून होना चाहिए जिसमें वंदे मातरम का अपमान करने वालों के लिए सजा का प्रावधान हो. जो लोग पाकिस्तान का झंडा फहराएं उनके लिए भी सजा होनी चाहिए. ओवैसी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में बहस में भाग लेने के दौरान यह मांग रखी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार संसद में ऐसे बिल नहीं लाएगी. बता दें कि एआईएमआईएम प्रमुख ने ट्रिपल तलाक बिल को “महिला विरोधी” करार दिया था. Also Read - J&K Latest News: जम्‍मू-कश्‍मीर के पुंछ में पाकिस्‍तान की फायरिंग में JCO शहीद

इससे पहले पिछले दिनों असदुद्दीन ओवैसी ने हरियाणा के महेंद्रगढ़ में कश्मीरी छात्रों के साथ हुई मारपीट के मामले में कहा था कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर राज में प्रशासन संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाने में बुरी तरह फेल हुआ है. वह लोगों को सुरक्षा भी नहीं दे पा रहा है. 2 कश्मीरी छात्रों को मस्जिद से बाहर आने पर पीटा गया है, मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा. हम क्या संदेश दे रहे हैं? उन्होंने क्या अपराध कर दिया है? उनपर हमला करने वाले लोग कौन हैं? सरकार लोगों को सुरक्षा देने की बजाय विचारधारा पर काम कर रही है.’

उल्‍लेखनीय है कि इससे पहले तीन तलाक पर प्रस्तावित कानून का कड़ा विरोध करते हुए एमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बीते शनिवार को ‘शरीयत’ की रक्षा के लिए भारतीय मुसलमानों से एक होने का आह्वान किया था. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मुद्दे पर दिए गए फैसले को अस्पष्ट बताते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई नहीं कह सकता कि एक बार में तीन दफा तलाक बोलने पर शादी समाप्त हो जाएगी या फिर उसे केवल एक तलाक माना जाएगा. उन्होंने आश्चर्य प्रकट किया कि सरकार कैसे संसद में विधेयक ला सकती है. उन्‍होंने नरेंद्र मोदी सरकार से पूछा कि क्या सरकार उन महिलाओं को आर्थिक सहायता मुहैया कराएगी, जिनके पतियों को तीन साल जेल भेज दिया जाएगा.