नई दिल्ली: देश में किसानों की आय बढ़ाने का मामला एक बड़ा मुद्दा है और केंद्र में सत्तरूढ़ नरेन्द्र मोदी सरकार किसानों की आय बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का दावा कर रही है और इसके लिए नीतियों की बात भी कर रही है. इसी क्रम में नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कहा है कि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि और राज्यों में आदर्श एपीएमसी अधिनियम अपनाए जाने से साल 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने में मदद मिलेगी.

बता दें कि हाल ही में, पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सरकार व्यापक और संतुलित नीति के माध्यम से गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक, पानी और बिजली के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए बाजार उपलब्ध कराने का लक्ष्य कर रही है.

सरकार के कदम लक्ष्य के मुताबिक
प्रतिस्पर्धी बाजारों को बढ़ावा देने सहित ये कदम सरकार के 5 साल में किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लक्ष्य के अनुरूप है. चंद ने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि यदि केंद्र सरकार द्वारा सुझाये गए उपायों को राज्य सरकारें अपनाती हैं तो हम राष्ट्रीय स्तर पर इस लक्ष्य को हासिल करने की स्थिति में होंगे.” उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में विकासदर 5 प्रतिशत के करीब है जो लक्ष्य हासिल करने के लिहाज से उचित है.

‘रोडमैप’ में बेहतर मूल्य प्राप्ति’ भी शामिल
नीति आयोग के सदस्य ने कहा कि केंद्र ने लक्ष्य हासिल करने के ‘रोडमैप’ के घटकों में ‘किसानों द्वारा बेहतर मूल्य प्राप्ति’ को भी शामिल किया है. हालांकि, उन्होंने माना कि यह केवल एमएसपी में वृद्धि के माध्यम से ही इसे हासिल नहीं किया जा सकता है.

नीति आयोग के सदस्य ने कहा, “यही कारण है कि हम राज्यों में आदर्श कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियम को अपनाने पर जोर दे रहे हैं. प्रतिस्पर्धी बाजार भी किसानों के लिये उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ किसानों को उपलब्ध करने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं.”

वैकल्पिक स्रोतों को तैयार  करना होगा 
नीति आयोग के सदस्य ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को विभिन्न लागतों में कटौती, फसल के लिए उचित मूल्य दिलाकर, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को रोककर और आय के वैकल्पिक स्रोतों को तैयार कर हासिल किया जा सकता है.

 कुछ खास बातें
– पिछले महीने, सरकार ने धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में 200 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की
– 200 रुपए की बढ़ोतरी के कारण राजकोष पर 15,000 करोड़ रुपए से अधिक का बोझ आएगा.
– वर्ष 2012-13 के फसल वर्ष में धान के एमएसपी में सबसे ज्यादा वृद्धि 170 रुपए प्रति क्विंटल की हुई थी
– पिछले चार वर्षों में, राजग सरकार ने धान के एमएसपी में 50 से 80 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बढ़ोतरी की है
– एनडीए ने साल 2014 में किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिलाने का वादा किया था
– लेकिन फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य लागू करने की घोषणा बजट 2018-19 में की गई