नयी दिल्ली: भाजपा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की भारत में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार पर की गई टिप्पणी पर हमला बोलते हुए रविवार को उनके (इमरान के) देश को अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार की भूमि बताया, जहां 1947 से अत्याचार किए जा रहे हैं. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इमरान खान की टिप्पणी को ‘सौ चूहे खा के बिल्ली चली हज को’ करार दिया. पाकिस्तान की कड़ी आलोचना करते हुए नकवी ने कहा कि वर्ष 1947 में देश के अस्तित्व में आने के बाद से हिन्दू, सिखों और ईसाइयों जैसे अल्पसंख्यकों की आबादी में वहां करीब 90 प्रतिशत की गिरावट आई है क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथियों ने सरकार के साथ मिलीभगत कर उन्हें निशाना बनाया है.

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नकवी ने कहा कि पाकिस्तान में जहां अल्पसंख्यकों की हत्या की जाती है, लोगों को धर्म परिवर्तन करने को मजबूर किया जाता है या देश छोड़ने के लिए मजूबर किया जाता, वहीं भारत में वे विकसित हुए हैं और विकास में साझा हिस्सेदार हैं. पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की आबादी दो से तीन प्रतिशत ही है. खान पर निशाना साधते हुए नकवी ने यूसुफ खान (दिलीप कुमार), आमिर खान, सलमान खान और शाहरुख खान जैसे कई भारतीय कलाकारों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में कई पीढ़ियों ने उन्हें (कलाकारों को) सराहा है. नकवी ने कहा, ‘क्या इमरान एक भी ऐसे कलाकार का नाम बता सकते हैं जो अल्पसंख्यक समुदाय से हो और उनकी ऐसी ही लोकप्रियता हो जितनी इन (उपरिनिर्दिष्ट) कलाकारों की भारत में हैं.’ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शनिवार को कहा कि वह नरेंद्र मोदी सरकार को ‘दिखाएंगे’ कि ‘अल्पसंख्यकों से कैसे व्यवहार करते हैं?’

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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खान का यह बयान बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की भारत में भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसाओं पर की टिप्पणी को लेकर जारी विवाद के बीच आया है. नकवी ने नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी पर कहा कि जिनकी टिप्पणियों में देश में भीड़ हिंसा पर चिंता व्यक्त की गई थी, उनके हवाले से इमरान खान ने शनिवार को कहा कि वह भारत सरकार को अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार करने का तरीका दिखाएंगे. नकवी ने कहा, ‘नसीरुद्दीन शाह को यह समझना चाहिए कि ऐसा बड़ा बयान जो कि तथ्यात्मक रूप से गलत है उससे काफी नुकसान हो सकता है और भारत विरोधी ताकते इसका देश के खिलाफ इस्तेमाल कर सकती हैं. गौारतलब है कि गत गुरुवार को एक वीडियो सामने आया था जिसमें नसीरुद्दीन ने कहा, ‘कई इलाकों में हम देख रहे हैं कि एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत से ज्यादा एक गाय की मौत को अहमियत दी जा रही है. ऐसे माहौल में मुझे अपनी औलाद के बारे में सोचकर फिक्र होती है.’