नई दिल्‍ली. नेशनल हाईवे पर चलने वाले कार पैसेंजर और अन्‍य वाहन चालकों को लिए बड़ी खुशखबरी है. जल्‍द ही उन्‍हें नेशनल हाईवे के टोल प्‍लाजा पर टोल टैक्‍स चुकाने के लिए रुकने की जरूरत नहीं होगी. उन्‍हें जल्‍द ही टोल टैक्‍स चुकाने के कई ऐसे विकल्‍प उपलब्‍ध होंगे, जिनसे उनका टोल चुकाने की लाइन में लगने वाले वक्‍त की बड़ी बचत होगी. वे आने वाले दिनों में इस अपने मोबाइल फोन से ही टोल टैक्‍स चुका सकेंगे. मोबाइल को प्री-पेड वॉलेट, क्रेडिट कार्ड या बैंक अकाउंट में से किसी से भी जुड़ा होना चाहिए. इससे टोल की रकम ऑटोमैटिक यात्री के अकाउंट से कट जाएगी और वह टोल पर बिना रुके हुए अपनी यात्रा कर सकेगा.

5 एनएच पर 5 नए सुधारों का चल रहा परीक्षण
नेशनल हाइवेज ऑथारिटीज ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने 5 नए सुधारों का चयन किया है. इनका परीक्षण पांच चरणों में दिल्‍ली-मुंबई, दिल्‍ली-चंडीगढ़, दिल्‍ली-कोलकाता और बेंगलुरु-चेन्‍नई नेशनल हाईवे पर चल रहा है. एनएचएआई जल्‍द ही एक मोबाइल एप्लिकेशन शुरू करेगी, जिसमें टोल-टैक्‍स चुकाने के लिए सभी विकल्‍प उपलब्‍ध होंगे.

टोल टैक्‍स चुकाने का पहला विकल्‍प
एनएचएआई के अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों को मोबाइल एप डाउन लोड करने की जरूरत होगी और वाहन की सभी डिटेल देनी होगी. इसकी जांच नेशनल वेहिकल डाटाबेस (वाहन) से होगी और ये वाहन के मालिक और रजिस्‍ट्रेशन की वैधता की सत्‍यता का परीक्षण करेंगे. एक विकल्‍प ऐसा है, जिसमें यात्रा शुरू करने से पहले रास्‍ते में पड़ने वाले सभी टोल प्‍लाजा का टैक्‍स अग्रिम दे सकते हैं. इसे प्रीपेड वॉलेट से एप के जरिए चुक्‍ता कर सकते हैं. वाहन के टोल प्‍लाजा पहुंचने से पहले सिस्‍टम क्‍यू आर कोड जनरेट करेगा, जिसे ड्राइवर को प्‍लाजा पर स्‍कैन करना होगा.

टोल चुकाने का दूसरा विकल्‍प
यात्रियों के लिए दूसरा विकल्‍प है मोबाइल को एप को यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) से टोल टैक्‍स सीधे बैंक अकाउंट्स में जमा करना होगा. मोबाइल पर आधारित दो टेक्‍नीक वाई-फाई/ ब्‍ल्‍यूटूथ और मोबाइल पर ही आधारित अल्‍ट्रासाउंड टेक्‍नॉलॉजी का परीक्षण चल रहा है. इनकी मदद से टोल टैक्‍स चुक्‍ता किया जा सकेगा. इसमें जैसे ही वाहन टोल प्‍लाजा पर पहुंचता है, सिस्‍टम टोल लेन, वाहन की कैटेगरी और सही टोल राशि तय होने के बाद वॉलेट या बैंक अकाउंट से यूपीआई गेटवे के जरिए कट जाएगी.

टोल चुकाने का तीसरा विकल्‍प
टोल चुकाने का एक तरीका है फ्री- फ्लो या गैन्ट्री-आधारित टोलिंग. ये तरीका ताइवॉन के पूरे हाईवेज में लागू है. ओवरहेड इलेक्‍ट्रॉनिक गैंन्‍ट्रीज में आरएफआडी टेक्‍नॉलॉजी से वाहन की पहचान फास्‍ट टैग के जरिए की जाती है. इससे अपने आप टोल की राशि कट जाएगी. लेकिन माना जा रहा है कि इससे टोल टैक्‍स की वसूली में नियमों का उल्‍लंघन करने वाले वाहन चालकों से वसूली में कठिनाई होगी, क्‍योंकि हमारा डाटो सिस्‍टम बहुत कमजोर है.

बेहतर सुविधाओं के लिए पैसा देना होगा
केंद्रीय परिवहन एवं एनएच हाईवेज मंत्री ने हाल ही में कहा, हाईवेज से टोल-टैक्‍स खत्‍म करने का कोई प्रावधान नहीं है. हमें अधिक हाईवेज बनाने की जरूरत है, जिनमें अधिक निवेश की जरूरत है. लेकिन इतने बड़े काम के लिए बजट पर्याप्‍त नहीं है. हमने 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक के कामों को हाथ में लिया है, जबकि बजट में 60,000 से 65,000 करोड़ रुपए का ही प्रावधान है. लोगों को बेहतर सुविधाओं के लिए चुक्‍ता करना होगा.