मुंबईः भारी बारिश की वजह से देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पूरी तरह से थम गई है. कई इलाकों में पानी भर गया है. रेल और हवाई सेवाओं के साथ मुंबई की जीवनरेख कही जाने वाली लोकल ट्रेनों का परिचालन भी प्रभावित हुआ है. चेंबुर, सिऑन जैसे कई इलाकों में घुटने से ऊपर तक पानी भरा हुआ है. इस बीच रिपोर्ट आई है कि बादलापुर और वांगनी के बीच महालक्ष्मी एक्सप्रेस फंग गई है. इस ट्रेन में 2000 से अधिक यात्री सवार है. उन्हें पानी की बोतलें और बिस्कुट दिए जा रहे हैं. जल्द ही एनडीआरएफ की टीम के मौके पर पहुंचने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुमानों के मुताबिक महाराष्ट्र के तीन जिलों रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग के साथ मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है.

गौरतलब है कि मुंबई में पिछले कई दिनों ने लगातार बारिश हो रही है. इसने 26 जुलाई, 2005 के प्रकोप की याद दिला दी है. उस दिन 944 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी. ठीक 14 साल बाद हुई इसी तरह की भारी बारिश से मुंबई के कई हिस्सों में जलभराव हो गया और यातायात बाधित हो गया. साथ ही कई उड़ानों में देरी हुई. मुंबई हवाई अड्डा के प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि मुंबई हवाई अड्डे से 17 उड़ानों का मार्ग परिवर्तित कर समीप के हवाई अड्डों पर भेजा गया और चार उड़ानों को उतरने से पहले काफी देर हवा में ही चक्कर लगाने पड़े. इसी दिन 14 साल पहले मुंबई भारी बारिश की चपेट में आई थी जिससे शहर भर में तबाही मच गई थी, कई लोगों की जान चली गई थी और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था.

कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उस दिन को याद किया. ट्विटर यूजर मधु ने कहा, “आज 26 जुलाई है 14 साल पहले इस दिन मुंबई की सड़कें नदियों में तब्दील हो गई थीं और लोगों को घर पहुंचने के लिए कठिन यात्रा करनी पड़ी थी. इस दिन को लेकर आपकी क्या यादें हैं, क्या आप बारिश में फंसे हुए थे, आप सुरक्षित स्थानों पर कैसे पहुंचे थे? चलिए यहां साझा करते हैं.” एक अन्य यूजर अभिषेक श्रीवास्तव ने 2005 की बारिश पर ट्वीट किया, “मैं विद्याविहार से पवई तक पैदल गया था क्योंकि ट्रेन सेवा मातुंगा से विद्याविहार तक रुक गई थी. आठ घंटे का सफर पैदल तय किया. उसी दिन घर पहुंच गया था.”

कुछ लोगों ने मुंबई के जज्बे को याद किया और बताया कि लोगों ने कैसे 2005 की बारिश से पार पाया और जरूरतमंदों की मदद की. लोगों ने फंसे हुए लोगों को शरण देने के लिए अपने घर के दरवाजे खोले जबकि अन्य ने बाहर निकल कर खाना एवं पानी उपलब्ध कराया.