बारिश के पानी में चले तो हो जाएं सावधान! 72 घंटे की ये एक गलती बन सकती है जानलेवा, BMC ने जारी किया हाई अलर्ट

Written By: Tanuja Joshi Updated by: Tanuja Joshi
Updated Date:July 9, 2026 11:51 PM IST

मुंबई में लगातार बारिश के बाद बीएमसी ने लेप्टोस्पायरोसिस को लेकर चेतावनी जारी की है. गंदे या रुके हुए बारिश के पानी में चलने वालों को 72 घंटे के भीतर डॉक्टर से सलाह लेने की अपील की गई है, ताकि गंभीर संक्रमण से बचा जा सके.

  • बारिश के गंदे और रुके हुए पानी में चलने से लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ जाता है.
  • संक्रमण के बाद पहले 72 घंटे इलाज शुरू करना सबसे जरूरी माना जाता है.
  • तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द और लाल आंखें इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं.
  • जलभराव से निकलने के बाद साबुन से शरीर साफ करें और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें.

Mumbai Leptospirosis Warning: मुंबई में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने जहां लोगों को गर्मी से राहत दी है, वहीं जलभरवा ने एक नई स्वास्थ्य चुनौती भी खड़ी कर दी है. सड़कों पर जमा गंदा पानी अब केवल आवाजाही में परेशानी की वजह नहीं, बल्कि जानलेवा वायरस का खतरा भी बन सकता है. इसी को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने नागरिकों के लिए स्पेशल हेल्थ एडवाइजरी जारी की है और लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis) नाम की बीमारी से बचने की अपील की है.

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लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है, जो संक्रमित जानवरों के मूत्र से फैलता है. मानसून में बारिश के दौरान चूहे, आवारा कुत्ते और अन्य जानवरों का संक्रमित मूत्र बारिश के पानी में मिल जाता है. जब कोई व्यक्ति ऐसे पानी में नंगे पैर या खुले घाव के साथ चलता है, तो बैक्टीरिया त्वचा की छोटी खरोंचों या आंख, नाक और मुंह की झिल्लियों के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है

शुरुआती लक्षण

इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं. संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में तेज दर्द, आंखों का लाल होना, उल्टी, दस्त या शरीर पर चकत्ते जैसी शिकायतें हो सकती हैं. कई बार लोग इन्हें सामान्य मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है.

अगर समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचा सकती है. गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत, आंतरिक रक्तस्राव, मस्तिष्क की झिल्ली में संक्रमण (मेनिन्जाइटिस) और बहु-अंग विफलता जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं। इसलिए डॉक्टर शुरुआती लक्षणों को हल्के में न लेने की सलाह देते हैं.

क्या है 72 घंटे की 'गोल्डन विंडो'?

बीएमसी ने विशेष रूप से 72 घंटे की 'गोल्डन विंडो' पर जोर दिया है. अगर कोई व्यक्ति बारिश या बाढ़ के गंदे पानी में चला है, तो उसे 24 से 72 घंटे के भीतर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. जोखिम के आधार पर चिकित्सक एंटीबायोटिक दवाएं जैसे डॉक्सीसाइक्लिन या एजिथ्रोमाइसिन दे सकते हैं. समय रहते दवा शुरू करने से संक्रमण को गंभीर होने से पहले ही रोका जा सकता है.

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचें. अगर मजबूरी में ऐसे पानी से गुजरना पड़े तो घर पहुंचकर पैरों और शरीर के खुले हिस्सों को साबुन से अच्छी तरह धोएं. अगर पैरों में कट या घाव है तो उसे पूरी तरह ढककर ही बाहर निकलें. इसके अलावा बारिश के दिनों में बुखार या मांसपेशियों में दर्द होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना ज्यादा सुरक्षित रहेगा.

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