मुंबई: मुंबई में मानसून की बारिश हर साल लोगों की तकलीफ बढ़ाने लगी है. मानसूनी बारिश से शहर में हर साल बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं. मानसून के दौरान भारी बारिश होने पर सड़क और रेल की पटरियां डूब जाने से देश की आर्थिक राजधानी की हालत लचर हो जाती है. इससे बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) की तैयारियों पर भी सवाल होते हैं. बीएमसी ने दावा किया था कि मुंबई में बाढ़ जैसे हालात पैदा होने से रोकने के लिए हजारों करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, लेकिन दो दिन पहले ही शहर में जगह-जगह जल जमाव नजर आने लगा. Also Read - झारखंड के CM के खिलाफ रेप का आरोप, बांम्‍बे HC ने याचिका वापस लेने की नहीं दी इजाजत

बीएमसी में भ्रष्टाचार के कई मामलों का खुलासा कर चुके आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि बीएमसी को पिछली गलतियों से सीख लेनी चाहिए और गंभीरता से विचार करना चाहिए कि आखिर क्यों थोड़ी सी भी बारिश होने पर शहर में बाढ़ आ जाती है. पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता एस बालकृष्णन ने कहा कि समस्या की ‘‘ जड़ें बहुत गहरी हैं. उन्होंने कहा, ‘बीएमसी के बजट का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा वेतन आदि जैसे स्थापना व्यय पर चला जाता है और शहर के लिए ज्यादा बचता ही नहीं.’ Also Read - Mumbai Local Train Update: मुंबई में आम लोगो के लिए जल्द शुरू होगी लोकल ट्रेन सर्विस! मुख्यमंत्री ने की अहम बैठक

शिवसेना शासित बीएमसी के मुताबिक, उसने अपनी बृम्सटुवड परियोजना के तहत जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 2005 से 2016 के बीच 2,007 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए भी बीएमसी ने बजट में 565.55 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है ताकि बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें. बहरहाल, समस्या जस की तस बनी रहने से परेशान आम लोग और विशेषज्ञ उचित नियोजन के अभाव का ठीकरा बीएमसी पर फोड़ रहे हैं. मुंबई के अर्बन डिजाइन रिसर्च इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक पंकज जोशी ने इसे ‘मानव निर्मित आपदा’ करार दिया और विकास से जुड़ी अनुमतियां दिए जाने में तेजी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया. Also Read - Kisan Andolan: मुंबई रैली में गरजे शरद पवार, पीएम मोदी से पूछा, क्या ये किसान पाकिस्तान के हैं?

एनजीओ प्रजा फाउंडेशन के परियोजना निदेशक मिलिंद म्हास्के ने कहा कि मुंबई की आधारभूत संरचना हर साल इसलिए चरमरा जाती है क्योंकि हम पर नियुक्त किए गए कार्यकारी शासन करते हैं जिन्होंने शहर में न तो निवेश किया है और न ही उनके पास कोई विजन है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों को सशक्त बनाने की जरूरत है ताकि वे उत्तरदायी बनें और स्थानीय प्रशासन के मामलों में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाएं.