डूबता हुआ सूरज उसे बहुत परेशान कर रहा था. मानो सूरज के ढलने के साथ उसकी जिंदगी जीने की उम्मीद भी धूमिल पड़ती जा रही थी.

वो लगातार ये दिखाने की कोशिश कर रहा था उसे मरने का कोई दुख नहीं. वो उस क्षण को एनजॉय कर रहा था. वो लोगों को आत्महत्या करने के टिप्स भी दे रहा था.

उसका नाम था अर्जुन भारद्वाज. मुंबई के नरसी मोंजी कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्‍स से इंजीनियरिंग कर रहा था. घर-परिवार बेंगलुरु में था. पैसों की कोई दिक्कत नहीं. लेकिन परीक्षा में बार-बार फेल हो रहा था.

मरने से ठीक पहले उसने फेसबुक लाइव भी किया, उसमें बताया कि सुसाइड कैसे की जाती है. लाइव में वो बिंदास नजर आने की कोशिश कर रहा था. जैसे मरने का कोई गम न हो. वो डरा हुआ भी नहीं था.

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वो लगातार सिगरेट फूंक रहा था. शराब पी रहा था. अपने आपको मरने के लिए तैयार कर रहा था. उसने बताया ‘मरने से पहले एक सुसाइड नोट छोड़ना जरूरी है. शराब भी जितनी पी सकते हैं पी डालिए. और अगर पास्ता खाने का मन हो तो वो भी खा सकते हैं.’

अर्जुन ये सब बोलते हुए खिड़की के बाहर ढलता हुआ सूरज देख रहा था. वो डिप्रेशन में था. ड्रग अडिक्ट हो चुका था. मरने से पहले उसने कहा, सीयू दोस्तों. फिर मिलते हैं. दूसरी दुनिया में.

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…..और अर्जुन ने होटल की 11 वीं मंजिल से छलांग लगा दी. अर्जुन ने सुसाइड से 5 घंटे पहले अपनी एक स्माइल वाली फोटो अपलोड की और कैप्शन लिखा “View to die for”. पुलिस को उसकी लाश निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. क्योंकि होटल 25 मंजिला था. अर्जुन के पिता ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपने बेटे से मुलाकात की थी.

वे अक्सर अर्जुन को लेकर परेशान रहते थे. लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि बेटा आत्महत्या कर लेगा.

आपको बता दें आजकल की व्यस्त ज़िन्दगी में डिप्रेशन या अवसाद एक ऐसी बीमारी है जो तेज़ी से अपनी पकड़ बना रही है. डिप्रेशन कई प्रकार का होता है, इसमें मेजर डिप्रेसिव डिसोर्डर सबसे मुख्‍य है.

यह सबसे आम प्रकार का डिप्रेशन है. इस डिप्रेशन में व्‍यक्ति बहुत अधिक समय तक उदास और डिप्रेस रहता है. इस डिप्रेशन के शिकार मरीजों का चेहरा देखकर पता लगाया कि वो किसी चीज को लेकर उदास है.

लेकिन सबसे ज्यादा खतरनाक है हाई फंक्शनिंग डिप्रेशन. इसका पता लगाना मुश्किल होता है. इसका शिकार आदमी अपनी भावनाओं को बखूबी दबा लेता है. जिसकी वजह से आस-पास के लोग इस बात का अंदाजा नहीं लगा सकते कि व्यक्ति के अंदर चल क्या रहा है.

डिप्रेशन के शिकार लोगों पर नजर रखनी चाहिए. ऐसे लोगों से ज्यादा से ज्यादा लोगों से बात करनी चाहिए. ताकि उनके अंदर के दर्द को निकाला जा सके.