मुंबई: मुंबई की एक विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर फरार शराब कारोबारी विजय माल्या को शनिवार को भगोड़ा आर्थिक अपराधी (एफईओ) घोषित किया. माल्या नए भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के प्रावधानों के तहत एफईओ घोषित होने वाला पहला कारोबारी बन गया है. यह अधिनियम पिछले वर्ष अगस्त में प्रभावी हुआ था. प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) की अदालत से माल्या को भगोड़ा घोषित करने तथा उसकी संपत्तियों को जब्त करने और उन्हें केन्द्र सरकार के नियंत्रण में लाने का अनुरोध किया था.

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विशेष न्यायाधीश एम एस आजमी ने माल्या के वकील तथा ईडी के वकील की व्यापक दलील सुनने के बाद माल्या को कानून की धारा 12 के तहत एफईओ घोषित किया. गौरतलब है कि माल्या मार्च 2016 को भारत छोड़ कर चला गया था. बता दें कि लंदन की अदालत ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी है. इस मामले को लेकर सोमवार को लंदन की वेस्टमिन्स्टर कोर्ट ने सुनवाई की. माल्या को भारत लाने के लिए सीबीआई के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम लंदन गई हुई थी. भारत सरकार काफी समय से माल्या के प्रत्यर्पण की कोशिश में लगी हुई थी. विजय माल्या दो मार्च, 2016 को भारत से भागा था.

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ठप खड़ी किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमुख रहे 62 वर्षीय माल्या पर करीब 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और धन शोधन का आरोप है. पिछले साल अप्रैल में प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से माल्या जमानत पर है. सीबीआई ने इस मामले में कहा कि उम्मीद है विजय माल्या को जल्द से जल्द भारत लाकर केस को आगे बढ़ाया जाएगा. हमने उसे भारत लाने के लिए काफी मेहनत की. हम इस केस को लेकर कानूनी रूप से मजबूत स्थिति में थे क्योंकि हमारे पास तथ्य थे. इसलिए हमें यकीन था कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण में हमें कामयाबी मिलेगी.