मुंबई की हाजी अली दरगाह के अंदरूनी हिस्से में जाने पर प्रतिबंध हटने के बाद आज यहां पहली बार महिलाएं प्रवेश करेंगी। दो साल पहले भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने दरगाह के मुख्य हिस्से में महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को चुनौती दी थी। Also Read - Sushant Singh Rajput Case: NCB ने सुशांत मामले से जुड़े ड्रग केस में 62 हजार पेज की चार्जशीट कोर्ट में दायर की

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बता दे कि 24 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट दरगाह के अंदरूनी हिस्से में महिलाओं को जाने की अनुमति दी थी. भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह-संस्थापक साफ़िज़ नियाज़ के मुताबिक, देशभर की करीब 80 महिलाएं आज वहां जाएंगी और चादर और फूल चढ़ाएंगी। यह भी पढ़े-ऐतिहासिक फैसला: ट्रस्ट को देना पड़ा हाजी अली दरगाह में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति Also Read - अमेरिकी कंपनी का बड़ा दावा, 'लद्दाख में सैन्य संघर्ष के बाद चीनी हैकरों ने मुंबई में किया था ब्लैकआउट'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि था अगर दरगाह के एक पॉइंट तक पुरुषों को जाने की इजाजत है और महिलाओं को नहीं तो ये दिक्कत की बात है। मंगलवार को बीएमएमए की महिला कार्यकर्ताएं दरगाह में प्रवेश करेंगी। मालूम हो कि दरगाह के जिस हिस्से में मजार है, वहां महिलाओं के जाने पर पाबंद थी। प्रवेश के लिए महिलाओं और पुरुषों के अलग रास्ते नई व्यवस्था के तहत ट्रस्ट ने दरगाह में प्रवेश के लिए महिलाओं और पुरुषों के अलग रास्ते बनाए हैं साथ ही अब कोई भी मजार को छू नहीं सकेगा।

मामले की सुनवाई के दौरान दरगाह की ओर से बताया गया था कि ट्रस्ट ने प्रस्ताव पास किया है कि बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा. ट्रस्ट महिलाओं को प्रवेश देगा। इसके लिए रूपरेखा भी तैयार की गई है। इस पर CJI ठाकुर ने कहा कि अगर ट्रस्ट महिलाओं को प्रवेश देने को तैयार है तो फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की क्या जरूरत है।

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन और दरगाह ट्रस्ट के बीच की इस कानूनी लड़ाई में कई मोड़ आए। भूमाता ब्रिगेड की प्रमुख तृप्ति देसाई भी इस मुद्दे से जुड़ गईं। कुछ कार्यकर्ताओं बीएमएमए के संघर्ष का समर्थन करते हुए ‘हाजी अली सबके लिए’ नाम का मंच बनाया। बता दें कि 2012 में दरगाह ट्रस्ट के लिए गए एक निर्णय के बाद से ही दरगाह के मुख्य गर्भगृह में महिलाओं का प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी।