नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में स्कूली शिक्षक बंधु प्रकाश पाल, उनकी गर्भवती पत्नी और नाबालिग बेटी की हत्या के मामले का खुलासा कर दिया गया है. आरएसएस से जुड़े स्कूली शिक्षक और उनके परिवार की हत्या किसी राजनैतिक वजहों से नहीं, बल्कि रुपयों के लेन-देन के कारण की गई थी. बंगाल पुलिस ने ये दावा करते हुए कहा कि बंधु प्रकाश पाल एक चिटफंड कंपनी चलाते थे. एक ‘फिक्स्ड डिपॉज़िट स्कीम’ के रुपए स्कूली शिक्षक के पास जमा थे. समय सीमा पूरी होने के बाद भी रुपए वापस नहीं करने पर जिनके रुपए जमा थे, उन्होंने ही स्कूली शिक्षक और उनके परिवार की हत्या कर दी. पुलिस ने हत्या में शामिल शख्स को अरेस्ट कर लिया है.

बता दें कि 8 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के जियागंज में स्कूली शिक्षक बंधू प्रकाश पाल, उनकी पत्नी और नाबालिग बेटी की उनके घर में हत्या कर दी गई थी. शिक्षक की पत्नी गर्भवती थी. तीनों की बुरी तरीके से धारदार हथियार से हत्या की गई थी. दावा किया गया था कि वह भाजपा-आरएसएस के समर्थक थे. इसलिए उन्हें राजनितिक साजिश के तहत मार दिया गया. इस घटना पर जमकर सियासी बवाल मचा. बीजेपी ने इसके लिए पश्चिम बंगाल सरकार को जिम्मेदार ठहराया था. वहीं, अब पश्चिम बंगाल पुलिस ने इसका खुलासा कर दिया है.

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बंगाल पुलिस के अनुसार, इन तीनों की हत्या निजी रंजिश की वजह से की गई और राजनीति से इसका कोई संबंध नहीं है. पुलिस ने बताया कि बंधु प्रकाश पाल एक चिट फंड कंपनी की तरह एक फर्म भी चलाते थे. इसे लीगल नहीं, बल्कि गैर कानूनी तरीके से चलाया जा रहा था. इसके तहत एक ‘फिक्स्ड डिपॉज़िट स्कीम’ भी चल रही थी. इस स्कीम के तहत वही लोग अकाउंट खुलवाकर पैसा जमा कर रहे थे, जो आर्थिक रूप से कमजोर थे. इन्हीं में से था उत्पल बेहेरा. बंधु प्रकाश पाल के घर के पास साहापुर गाँव के रहने वाले उत्पल बेहेरा ने इस स्कीम के तहत रुपए जमा किए. उत्पल के 48000 हजार रुपए जमा थे. और रुपए जमा करने की समय सीमा पूरी हो गई थी. पुलिस के मुताबिक उत्पल ने तय सीमा समाप्त होने पर रुपए वापस मांगे, जो शिक्षक बंधु प्रकाश पाल द्वारा वापस नहीं किए जा रहे थे. उत्पल बंधु प्रकाश पाल के घर भी रुपयों के लिए गया, लेकिन उसके साथ गलत व्यवहार किया गया. बार-बार कहने के बाद भी जब रुपए नहीं मिले तो गुस्साए उत्पल ने ये घातक कदम उठा लिया.

सीआईडी के एक सीनियर अफसर ने बताया कि तीनों के शवों के पास एक पासबुक मिली थी, जो उत्पल बेहेरा के नाम की थी. उत्पल की ये पासबुक गलती से वहाँ गिर गई थी. पुलिस ने इस पासबुक को देख जब उत्पल से पूछताछ की थी, तो रुपयों के लेन-देन के चलते हत्या की वारदात स्वीकार कर ली. वहीं, उत्पल के पिता माधब बेहेरा ने बात तो ये स्वीकार की कि उसके रुपए जमा थे, लेकिन ये मानने से इंकार कर दिया कि वह किसी वारदात में शामिल नहीं है.