असम: 90 सालों से चली आ रही इस परंपरा पर लगा ब्रेक, जानें राज्य सरकार ने क्यों लिया ये फैसला

राज्य सरकार का कहना है कि ये फैसला संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया. इससे विधानसभा की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी.

Published date india.com Published: February 22, 2025 8:13 PM IST
असम: 90 सालों से चली आ रही इस परंपरा पर लगा ब्रेक, जानें राज्य सरकार ने क्यों लिया ये फैसला

असम की हिमंता बिस्वा सरकार ने कई सालों से चली आ रही एक परंपरा पर ब्रेक लगा दिया है. राज्य सरकार ने विधानसभा में शुक्रवार को नमाज के लिए दिए जाने वाले दो घंटे के ब्रेक की दशकों पुरानी परंपरा को खत्म कर दिया. हालांकि, यह फैसला पिछले साल अगस्त में लिया गया था, लेकिन इसे हाल ही में बजट सत्र के दौरान लागू किया गया.

सरकार का कहना है कि यह फैसला संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और विधानसभा की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए किया गया है. हालांकि, इस फैसले के बाद विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया.

90 साल पहले शुरू हुई थी ये परंपरा

जानकारी के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत 1937 में मुस्लिम लीग के नेता सैयद सादुल्ला के कार्यकाल में हुई थी. तब से यह नियम चला आ रहा था, जिसमें शुक्रवार को मुस्लिम विधायकों को जुमे की नमाज अदा करने के लिए दो घंटे का विशेष ब्रेक दिया जाता था. इस दौरान, विधानसभा की कार्यवाही रोक दी जाती थी. हालांकि, अब सरकार का कहना है कि कार्यवाही को बिना किसी बाधा के चलाना जरूरी है, ताकि विधानसभा के कामकाज में उत्पादकता बढ़ाई जा सके.

असम विधानसभा के अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी ने प्रस्ताव रखा था कि बाकी दिनों की तरह शुक्रवार को भी बिना किसी अतिरिक्त ब्रेक के सदन की कार्यवाही जारी रहनी चाहिए. इस प्रस्ताव को कमेटी के सामने रखा गया और सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया.

हिमंता बिस्वा बोले- खत्म करना जरूरी था

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा, कि यह परंपरा ब्रिटिश काल के दौरान मुस्लिम लीग द्वारा शुरू की गई थी और अब इसे खत्म करना जरूरी था. उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी विशेष समुदाय के लिए अलग से नियम बनाने के बजाय सभी के लिए समान नियम लागू करना चाहती है.

उनका कहना है कि किसी धर्म विशेष के लिए विधानसभा की कार्यवाही रोकना सही नहीं है. क्योंकि यह सभी विधायकों और जनता के हितों से जुड़ा मामला है. उन्होंने इसे एक सकारात्मक और व्यावहारिक बदलाव बताया जो कार्यक्षमता को प्राथमिकता देता है.

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विपक्ष ने फैसले का किया विरोध

नमाज ब्रेक को खत्म करने के फैसले पर विपक्षी दलों ने असम सरकार पर निशाना साधा. कांग्रेस और AIUDF जैसे दलों का कहना है कि यह फैसला जबरन थोपा गया है और इससे अल्पसंख्यक समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है.

हालांकि, स्पीकर विश्वजीत दैमारी ने स्पष्ट किया कि संविधान की धर्मनिरपेक्षता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है. यह विधानसभा की कार्यवाही को बाधित न करने के लिए जरूरी था. अब नई व्यवस्था के तहत शुक्रवार को भी अन्य दिनों की तरह सदन की कार्यवाही बिना किसी ब्रेक के जारी रहेगी.

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