लखनऊ: मुस्लिम महिलाओं की पारिवारिक समस्याओं को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने ‘दारुल क़ज़ा‘ की तर्ज पर देश भर के प्रत्येक जिले में ‘परिवार सुलह केन्द्र‘ खोलने की योजना बनाई है. शरई अदालत के विपरीत इस केन्द्र में महिलाओं को मुखिया बनाया जाएगा. Also Read - Bigg Boss 14: बिग बॉस का हिस्सा बनेंगी रामानंद सागर की परपोती साक्षी चोपड़ा, कपड़े उतारने में है माहिर

Also Read - 'चेन्नई एक्सप्रेस' के 7 साल: शूटिंग के दिनों को याद कर दीपिका पादुकोण ने शेयर की Unseen Pics

धर्म के ठेकेदार महिलाओं के वजूद को खत्म करने की साजिश कर रहे हैं: निदा खान Also Read - ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रुजुएशन की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं होंगी या नहीं? सुप्रीम कोर्ट आज करेगा फैसला

तलाक, वरासत के मसलों को करेंगे हल

मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि संगठन की राष्ट्रीय समिति ने पिछले दिनों हुई बैठक में हर जिले में ‘परिवार सुलह केन्द्र’ बनाने का फैसला लिया गया है. समिति की कोशिश है कि एक साल के अंदर देश के सभी जिलों में ऐसे केन्द्र खोल दिए जाएं. राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल ने बताया कि दारुल क़ज़ा में जहां पुरुष को मुखिया बनाया जाता है, वहीं परिवार सुलह केन्द्र में महिलाओं को प्रमुख बनाया जाएगा. हालांकि मसले सुलझाने में उलमा की मदद भी ली जाएगी. मध्यस्थता इकाई की हैसियत से काम करने वाले इन केन्द्रों में सभी कौम के मसलों को सुलझाया जाएगा. लेकिन मुसलमानों से जुड़े तलाक तथा वरासत समेत विभिन्न मसलों पर खासतौर से ध्यान दिया जाएगा.

हलाला व तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने वाली निदा के खिलाफ फ़तवा देने वाले मुफ्ती और पूर्व पति पर मुकदमा

दारुल क़ज़ा में महिलाओं को इंसाफ नहीं मिलता

गौरतलब है कि कुछ महिला संगठन ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) द्वारा देश में विभिन्न स्थानों पर मुसलमानों में तलाक, वरासत तथा दीगर मसायल के हल के लिये खोले गए दारुल क़ज़ा में महिला काजी की नियुक्ति की मांग काफी पहले से कर रहे हैं. हालांकि अभी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. अफजाल ने ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर आरोप लगाया कि तीन तलाक को जायज ठहराने वालों द्वारा संचालित दारुल क़ज़ा में महिलाओं को आमतौर पर इंसाफ नहीं मिलता.

हलाला जैसी गंदगी से तलाकशुदा महिलाओं का हो रहा शारीरिक शोषण: वसीम रिजवी

दारुल क़ज़ा परिवार को तोड़ते हैं

उन्होंने कहा दारुल क़ज़ा परिवार को तोड़ने का काम करते हैं. हम कोशिश करेंगे कि परिवार को जोड़ें. उन्होंने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच देश भर में फैले अपने कार्यकर्ताओं से अपील करेगा कि वे जगह-जगह परिवार सुलह केन्द्र खुलवाएं. परिवार सुलह केन्द्र में लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में भी बताया जाएगा. अफजाल ने बताया कि उनके संगठन ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को गैर सरकारी पेंशन देने की योजना शुरू की है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में करीब 100 महिलाओं को दो महीने से यह पेंशन मिल रही है. जल्द ही इस योजना का विस्तार किया जाएगा. यह पेंशन पाने की इच्छुक महिलाएं परिवार सुलह केन्द्रों पर ही इसके लिये पंजीयन करा सकेंगी.

दारुल क़ज़ा के फैसलों को कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है

मालूम हो कि ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने देश के विभिन्न जिलों में दारुल क़ज़ा खोली हैं. इनका उद्देश्य मुसलमानों के तलाक, विरासत इत्यादि से जुड़े मसलों का शरई समाधान उपलब्ध कराना है. बोर्ड ने हाल में देश के विभिन्न जिलों में दारुल क़ज़ा खोलने का इरादा किया था. इसे लेकर खासा विवाद हुआ था. बाद में, बोर्ड ने गत 15 जुलाई को दिल्ली में हुई अपनी कार्यकारिणी बैठक के दौरान इस विवाद पर सफाई देते हुए कहा था कि दारुल क़ज़ा कोई समानान्तर अदालत नहीं, बल्कि मध्यस्थता परिषद हैं. इनमें किए गए फैसलों को सामान्य अदालतों में चुनौती दी जा सकती है. (इनपुट एजेंसी )