नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक आश्रयगृह में कई लड़कियों के यौन शोषण और शारीरिक उत्पीड़न के मामले में ब्रजेश ठाकुर को मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने ठाकुर को उसके शेष जीवन के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई.

अदालत ने ब्रजेश ठाकुर को 20 जनवरी को पॉक्सो कानून और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत बलात्कार और सामूहिक बलात्कार का दोषी ठहराया था.

बता दें कि बीती 4 फरवरी को दिल्ली की अदालत ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक आश्रय गृह में कई लड़कियों के यौन शोषण एवं शारीरिक उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराए गए ब्रजेश ठाकुर और 18 अन्य को 11 फरवरी को सजा सुनाना तय किया था.

– अदालत ने सीबीआई की तरफ से पेश किए 69 गवाहों के बयान दर्ज किए
– सीबीआई का पक्ष लोक अभियोजक अमित जिंदल ने रखा
– 44 लड़कियों के बयान दर्ज किए जिनका आश्रय गृह में शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न किया गया था, इनमें से करीब 13 मानसिक रूप से कमजोर थीं
– कुछ आरोपियों की तरफ से पेश हुए वकील धीरज कुमार ने कहा कि अदालत ने बचाव पक्ष के 20 गवाहों को सुना.
– सप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक इस मामले में सुनवाई प्रतिदिन चली और छह माह के भीतर पूरी कर ली गई
– अदालत ने 30 मार्च, 2019 को ठाकुर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे
– अदालत ने बलात्कार, यौन उत्पीड़न, नाबालिगों को नशा देने, आपराधिक धमकी समेत अन्य अपराधों के लिए मुकदमा चलाया था
– ठाकुर और उसके आश्रय गृह के कर्मचारियों के साथ ही बिहार के समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, ड्यूटी में लापरवाही और लड़कियों के उत्पीड़न की जानकारी देने में विफल रहने के आरोप तय किए गए थे.
– इस मामले में बिहार की समाज कल्याण मंत्री और तत्कालीन जद (यू) नेता मंजू वर्मा को भी आलोचना का शिकार होना पड़ा था, जब उनके पति के ठाकुर के साथ संबंध होने के आरोप सामने आए थे
– मंजू वर्मा ने आठ अगस्त, 2018 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
– सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले को 7 फरवरी, 2019 को बिहार के मुजफ्फरपुर की स्थानीय अदालत से दिल्ली के साकेत जिला अदालत परिसर की पॉक्सो अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था.
– यह मामला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) द्वारा 26 मई, 2018 को बिहार सरकार को एक रिपोर्ट सौंपने के बाद सामने आया था.
– यह रिपोर्ट उसी साल फरवरी में टिस ने बिहार समाज कल्याण विभाग को सौंपी थी.