'मैं अपने बयान...', पार्टी ने किया किनारा तो कंगना ने VIDEO जारी कर कृषि कानूनों पर जानें अब क्या कहा...

हिमाचल प्रदेश के मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत इससे पहले भी कई बार अपने बयानों की वजह से चर्चा में रही हैं. पिछले महीने ही एक बयान को लेकर पार्टी ने उन्हें फटकार लगाई थी.

Published date india.com Updated: September 25, 2024 1:14 PM IST
'मैं अपने बयान...', पार्टी ने किया किनारा तो कंगना ने VIDEO जारी कर कृषि कानूनों पर जानें अब क्या कहा...

बॉलीवुड एक्ट्रेस और हिमाचल के मंडी में BJP सांसद कंगना रनौत (Kangana Ranaut) एक बार फिर अपने बयानों की वजह से चर्चा में हैं. कंगना के कृषि कानूनों पर दिये बयान से पार्टी ने भी किनारा कर लिया. अपने बयानों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहीं कंगना ने अब वीडियो जारी कर सफाई दी है. कंगना ने बुधवार को साफ किया कि कृषि कानूनों को लेकर दिए गए उनके विचार निजी थे और वह इस मुद्दे पर अपनी पार्टी के साथ खड़ी हैं. BJP  नेता गौरव भाटिया ने सोशल मीडिया पोस्ट पर कहा था कि कंगना की ओर से कृषि कानूनों पर दिया गया बयान उनका व्यक्तिगत विचार है. वह भाजपा की ओर से ऐसा बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं.

इसके बाद कंगना रनौत ने गौरव भाटिया के ट्विटर पोस्ट को कोट करते हुए लिखा कि बिल्कुल, कृषि कानूनों पर मेरे विचार व्यक्तिगत हैं. वह उन बिलों पर पार्टी के रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं, धन्यवाद. वहीं कांग्रेस ने ट्वीट कर कंगना का एक वीडियो शेयर किया, जिसमें कंगना ने कथित तौर पर कहा था कि कृषि कानूनों को फिर से लागू किया जाना चाहिए.

बता दें कि कंगना ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि मुझे पता है कि यह बयान विवादास्पद हो सकता है, लेकिन तीनों कृषि कानूनों को वापस लाया जाना चाहिए और किसानों को खुद इसकी मांग करनी चाहिए. कंगना ने कहा था कि तीनों कानून किसानों के लिए फायदेमंद थे, लेकिन कुछ राज्यों में किसान समूहों के विरोध के मद्देनजर केंद्र ने इन कानूनों को निरस्त कर दिया है. किसान देश के विकास में ताकत का स्तंभ हैं मैं उनसे अपील करना चाहती हूं कि वे अपने भले के लिए कानूनों की वापसी की मांग करें.

पहले भी कई मौको पर पार्टी से मिली है चेतावनी

बता दें कि कंगना को इससे पहली भी कई बार पार्टी से चेतावनी मिल चुकी है. इससे पहले बीते महीने कंगना को भाजपा ने उस टिप्पणी के लिए चेतावनी दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन से भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. उनकी यह टिप्पणी बांग्लादेश की नेता शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और उनके खिलाफ छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के कारण भारत भागने के लिए मजबूर होने के कुछ दिनों बाद आई थी.

(इनपुट: IANS)

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