नई दिल्ली. भारतीय मूल की अमेरिकी वैज्ञानिक नलिनी नाडकर्णी ने एक अनोखे अभियान पर हैं. 64 साल की नलिनी 40 साल से कोस्टारिका के मान्टेवर्दे के जंगलों में रह रही हैं और जलवायु परिवर्तन पर अध्ययन कर रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन जंगलों में पैदल चलना मुमकिन नहीं है. नलिनी ऊंचे पेड़ों पर बैठकर यह शोध कर रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाने के लिए वह रस्सियों का इस्तेमाल करती हैं. Also Read - Heeng Cultivation In India: भारत में कहां होने जा रही हींग की खेती? आखिर क्यों माना जा रहा इसे बड़ी वैज्ञानिक सफलता

नलिनी नाडकर्णी के रिसर्च का विषय एपीफाइट्स (एक पेड़ से निकला दूसरा पौधा) है. वह जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र पर रिसर्च कर रही हैं. वह जिन जंगलों में रह रही हैं वहां लगभग पूरे साल बादल छाए रहते हैं. लेकिन कुछ सालों से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा मंडरा रहा है. वहां के पक्षी और चमगादड़ गायब हो रहे हैं,स जिससे नलिनी काफी चिंतित हैं और उसे बचाने का प्रयास कर रही हैं. Also Read - गगनयान मिशन: अंतरिक्ष में भारतीय को भेजना है कठिन है, लेकिन क्षमता है

जलवायु परिवर्तन खतरा
नलिनी कोरल रीफ (मूंग की चट्टानों), ग्लेशियर और क्लाउट फॉरेस्ट पर जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा खतरा मानती हैं. उनके मुताबिक, धरती के जंगलों में केवल 1% ही क्लाउड फॉरेस्ट है. यहां किसी पेड़ पर चढ़ने पर वह अंधेरे और हवारहित माहौल से काफी ऊपर तक चली जाती हैं. इसका मतलब है कि जलवायु परिवर्तन जमकर हो रहा है. Also Read - India will launch 31 satellite on 10 jan 2018 | नए साल में इसरो की नई उड़ान, एक साथ छोड़ेगा 31 सैटेलाइट

40 साल से पेड़ पर रह रही हैं
वह 40 साल से पेड़ों पर चढ़ रही हैं. वह पेड़ों को दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह मानती हैं. हालांकि, तीन साल पहले रस्सी टूटने की वजह से एक हादसे में वह घायल हो गई थीं. उनकी हड्डी में पांच जगह चोट लग गई थी. कमर की हड्डी तीन जगह से और 9 पसलियां टूट चुकी हैं. उनका कहना है कि शरीर का शेप बिगड़ चुका है लेकिन रिसर्च में दिक्कतें नहीं आ रही हैं.