डिजिटल सुरक्षा में बड़ा कदम: अब हर कॉल पर दिखेगा कॉल करने वाले का असली नाम, घटेंगी फर्जी कॉल्स

यह कदम भारत को वैश्विक स्तर पर CNAP जैसी सुविधाओं (जैसे अमेरिका में) के करीब लाएगा. TRAI के चेयरमैन ने कहा कि इससे "मोबाइल कम्युनिकेशन में पारदर्शिता" आएगी. अगर आपका फोन CNAP-सपोर्टिव है, तो जल्द ही यह फीचर आपके पास आ सकता है.

Published date india.com Published: October 30, 2025 10:20 AM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने हाल ही में दूरसंचार विभाग (DoT) के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस प्रस्ताव के तहत, आने वाले कॉल पर रिसीवर के फोन स्क्रीन पर कॉलर का नाम डिफ़ॉल्ट रूप से दिखाई देगा, साथ ही उनका नंबर भी. यह सुविधा कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) के नाम से जानी जाती है और इसका मुख्य उद्देश्य स्पैम कॉल्स, फ्रॉड और साइबर अपराधों को रोकना है. 28 अक्टूबर 2025 को TRAI ने DoT के बैक-रेफरेंस पर अपना जवाब जारी किया.

वर्तमान में आने वाले कॉल पर केवल नंबर दिखता है. अगर नंबर कॉन्टैक्ट्स में सेव न हो, तो unknown number के रूप में आता है. CNAP के लागू होने पर, कॉलर का सत्यापित नाम जो SIM रजिस्ट्रेशन के दौरान KYC के आधार पर दर्ज किया गया है, वह दिखाई देगा. उदाहरण के लिए, अगर कोई अनजान नंबर से कॉल आए, तो स्क्रीन पर “राहुल शर्मा” या “ABC कंपनी” जैसा नाम दिखेगा.

तकनीकी प्रक्रिया में क्या बदलेगा

टेलीकॉम ऑपरेटर्स (जैसे Jio, Airtel, Vodafone-Idea) को अपना कॉलिंग नेम (CNAM) डेटाबेस बनाना होगा, जिसमें सब्सक्राइबर्स के सत्यापित नाम और नंबर लिंक होंगे. कॉल आने पर, रिसीविंग नेटवर्क लोकल नंबर पोर्टेबिलिटी डेटाबेस (LNPD) के जरिए इस डेटाबेस से नाम खींचेगा और डिस्प्ले करेगा.यह सुविधा बेसिक टेलीकॉम सर्विस के साथ एकीकृत होगी, यानी कोई अतिरिक्त ऐप जैसे Truecaller की जरूरत नहीं पड़ेगी.

डिफ़ॉल्ट एक्टिवेशन

यह सुविधा सभी यूजर्स के लिए डिफ़ॉल्ट रूप से चालू रहेगी, लेकिन प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए ऑप्ट-आउट विकल्प उपलब्ध होगा. अगर कोई यूजर नाम न दिखाने का अनुरोध करेगा, तो TSP (टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर) इसे बंद कर देगा. CLIR (कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन रिस्ट्रिक्शन) वाले यूजर्स जैसे इंटेलिजेंस एजेंसी अधिकारी या VIP के नाम नहीं दिखेंगे. टेलीमार्केटर्स या बिजनेस लाइन्स के लिए अलग से सत्यापित ट्रेडमार्क नाम इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन सरकारी वेरिफिकेशन जरूरी होगा.

इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी?

भारत में स्पैम और फ्रॉड कॉल्स एक बड़ी समस्या बन चुकी हैं. TRAI के अनुसार रोजाना लाखों अनचाही कॉल्स आती हैं, जो फाइनेंशियल फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स आदि से जुड़ी होती हैं. यह सुविधा रिसीवर को कॉल लेने से पहले सूचित निर्णय लेने में मदद करेगी.TRAI ने कहा कि CNAP से स्पैम कॉल्स में कमी आएगी और डिजिटल ट्रस्ट बढ़ेगा.

कब और कैसे लागू होगा?

फेज्ड अप्रोच: पहले 4G और 5G नेटवर्क पर शुरू होगा, फिर 2G/3G पर विस्तार.
समयसीमा: DoT को टेलीकॉम ऑपरेटर्स को निर्देश जारी करने होंगे.
कम से कम एक सर्कल में एक हफ्ते के अंदर पायलट लॉन्च.

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