नई दिल्ली. चंडिकादास अमृतराव देशमुख, जिन्हें लोग प्यार से नानाजी देशमुख कहते हैं, को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा. भारत रत्न अटल बिहारी के बाद वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से ऐसे दूसरे नेता हैं जिन्हें देश के इस प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित किया जाने वाला है. नानाजी को मरणोपरांत यह सम्मान दिया जाने वाला है. नानाजी के साथ पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और गायक भूपेन हजारिका को भी भारत रत्न से सम्मानित किया जायेगा. नानाजी 1928 में 12 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हुए और बाद में वह दक्षिणपंथी समूह की राजनीतिक शाखा भारतीय जनसंघ के सदस्य बने. इसके बाद वह जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा बने. बता दें कि केंद्र सरकार ने इस साल 112 विभूतियों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा है, जिसमें चार पद्म विभूषण, 14 पद्म भूषण और 94 पद्म श्री शामिल हैं.

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नानाजी देशमुख 1977 और 1979 के बीच छठी लोकसभा के सदस्य थे और 1999 में तत्कालीन राजग सरकार ने उन्हें राज्यसभा सदस्य के तौर पर मनोनीत किया. राज्यसभा की वेबसाइट के अनुसार नानाजी विवाहित थे. उन्होंने आरएसएस की विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए भारत भर में सरस्वती विद्या मंदिर स्कूलों की श्रृंखला शुरू की. उन्होंने दीनदयाल रिसर्च इंस्टीट्यूट और मध्य प्रदेश में चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की भी स्थापना की, जिसे देश का पहला ग्रामीण विश्वविद्यालय माना जाता है. पद्म विभूषण से सम्मानित नानाजी को चित्रकूट में करीब 500 गांवों में उनके कार्यों के लिये जाना जाता है. 94 साल की उम्र में 2010 में उनका निधन हुआ.

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RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से नानाजी के पारिवारिक सम्बन्ध थे. नानाजी की उभरती सामाजिक प्रतिभा को पहचानते हुए हेडगेवार ने उन्हें संघ की शाखा में आने के लिए कहा. सन् 1940 में हेडगेवार के निधन के बाद आरएसएस को खड़ा करने की ज़िम्मेदारी नानाजी पर आ गई और इस संघर्ष को अपने जीवन का मूल उद्देश्य बनाते हुए नानाजी ने अपना पूरा जीवन संघ के नाम कर दिया. संघ का विचार हिंदू राष्‍ट्रवाद पर आधारित था. लेकि‍न नानाजी देशमुख ने संघ और देश को एक नया विचार ‘मैं अपने लिए नहीं, अपनों के लिए हूं” दिया. नानाजी चित्रकूट में पहली बार 1989 में आए तो यहीं के होकर रह गए.

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आजीवन सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में देश की सेवा करने वाले नानाजी देशमुख का जन्म महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कडोली गांव में 11 अक्टूबर 1916 को हुआ था. उनके पिता का नाम अमृतराव देशमुख था और मां का नाम राजाबाई था. नानाजी के दो भाई एवं तीन बहनें भी थीं. नानाजी के बाल्यकाल में ही इनके माता-पिता का देहांत हो गया. 9वीं कक्षा में पढ़ने के दौरान उनकी मुलाकात राष्ट्री स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार से हुई. हेडगेवार इस किशोर उम्र के नानाजी देशमुख के कार्यों से बहुत प्रभावित हुए. वर्ष 1940 में नानाजी ने नागपुर से संघ शिक्षा वर्ग का प्रथम वर्ष पूरा किया. उसी साल डॉ. हेडगेवार के निधन के बाद वे पूरी तरह संघ के समर्पित कार्यकर्ता बन गए.

(इनपुट – एजेंसी)