नई दिल्ली: LAC पर भारत-चीन सेना के बीच लगातार तनाव जारी है. यह तनाव सोमवार रात घटी घटना के बाद और भी बढ़ गया है. इस घटना में भारतीय सेना के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए. वहीं चीनी सेना के 43 जवान गंभीर रूप से घायल हुए है साथ ही इन्ही 43 लोगों में से कई लोगों के मरने की बात भी सामने आई है. एक तरफ जहां चीन वहीं दूसरी तरफ नेपाल से भी भारत के रिश्ते में खटास आने लगे हैं. वहीं अगर पड़ोसी देश पाकिस्तान की बात करें तो हर बार भारत संबंधों को मजबूत करने की कोशिश करता है लेकिन पाकिस्तान की तरफ आतंकी गतिविधियों को प्रमोट किया जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन सभी मामलों से निपटने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. आज देश में व प्रधानमंत्री मोदी के सामने ऐसे 5 मुद्दे हैं. अब देखना ये है कि पीएम मोदी इन मामलों का निपटारा कैसे करते हैं. Also Read - VIDEO : सुरेश रैना के साथ नेट्स में लौटे में रिषभ पंत, ये भारतीय खिलाड़ी भी शुरू कर चुके हैं प्रैक्टिस

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चीन के वुहान से निकले वायरस ने दुनिया में तो तबाही मचाई ही लेकिन भारत भी इससे अछूता नहीं रहा. आज के परिदृश्य में देखे तो भारत में कोरोना संक्रमण के मामले 3.5 लाख तक पहुंच चुके हैं. वहीं मरने वालों की संख्या भी 10,000 तक पहुंच चुकी है. ऐसे में कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन लगाया गया. लेकिन कोरोना अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है. साथ ही एक्सपर्ट द्वारा ये कहा जाना की कोरोना का अपने पीक पर आना अभी बाकी है. यह भारत सरकार व पीएम मोदी के लिए खतरे की घंटी बन चुका है. Also Read - नेपाल के पीएम ओली का बयान- नेपाल में जन्मे थे भगवान राम, असली अयोध्या नेपाल में है

लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था पर मार

देश में कोरोना माहमारी के फैलने व लॉकडाउन लागू किए जाने के बाद से ही भारतीय अर्थव्यवस्था लागातार गिरती जा रही है. ऐसे में देश में अर्थव्यवस्था को संभालना बेहद अहम है. अर्थव्यवस्था आज के वक्त में भारत सरकार के लिए अहम मुद्दा बन चुका है. गिरती अर्थव्यवस्था पर कंट्रोल पाना बेहद जरूरी है. बता दें कि अर्थव्यवस्था में गिरावट के कारण नौकरी जाने का खतरा, महंगाई, बाल मजदूरी इत्यादि कई तरह की दिक्कतों का सामना देश को करना पड़ सकता है. लॉकडाउन के कारण देश में कई फैक्ट्रियां अब भी बंद हैं. साथ लगातार कंपनियों को नुकसान भी झेलना पड़ रहा है.

चीन की चाल

LAC पर चीन द्वारा लगातार समस्या पैदा की जा रही है. बीते 6 जून को सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बैठक में चीनी सेना ने पूरे गलवान वैली को चीन का हिस्सा बताया. वहीं बीते सोमवार की रात भारतीय सैनिकों पर उनके रॉड, पत्थरों, लाठियों और डंडों से हमला भी कर दिया. इस दौरान भारतीय सेना के अधिकारियों समेत 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए. वहीं दूसरी ओर लगभ 43 चीनी सैनिकों के मरने व गंभीर रूप से घायल होने की बात सामने आई. बता दें कि चीन की चालबाजी लगातार असम क्षेत्र और लद्दाख क्षेत्र में देखने को मिल रही है. एकतरफ चीन का कहना है कि वह भारत के साथ शांति से हालात का निपटारा करना चाहता है. वहीं दूसरी तरफ उसके सैनिक भारतीय सेना पर हमला कर रहे हैं. साथ ही चीनी सरकार का माउथपीस अखबार ग्लोबल टाइम्स भी भारत के खिलाफ लगातार आग उगल रहा है. साथ ही चेतावनी भी जारी कर रहा है.

नेपाल के साथ रिश्तों में खटास

नेपाल के साथ भारत के रिश्ते सिर्फ राजनैतिक या राजनायिक नहीं है. बल्कि भारत के साथ नेपाल का रिश्ता सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक भी है. यूं कहें कि नेपाल के साथ भारत का रिश्ता रोटी बेटी तक का है. लेकिन चीन की तरफ झुकाव रखने वाली नेपाल की कम्युनिष्ट पार्टी के नेता केपी शर्मा ओली के सत्ता में आते ही भारत के साथ रिश्ते कमजोर पड़ने लगे हैं. अब इसी बीच चीन की शह पर नेपाल भारत को आंख दिखाने लगा है. नेपाल सरकार ने नया नक्शा जारी कर बगैर किसी भारतीय राजनायिकों के साथ बैठक व सलाह के बगैर अपने सदन में नक्शे को पास कर दिया है. हालांकि देश के पहले के राजनेता और आज के राजनेताओं का मत नेपाल के मामले में स्पष्ट है. बीते दिनों प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि भारत कैसे खुश रह सकता है, जब उसका पड़ोसी देश नेपाल दुखी हो. यह नेपाल के लिए भारत की समर्पित भावन व अटूट रिश्ते को ही दर्शाता है.

ओछी हरकत कर रहा पाकिस्तान

भारत इस समय 2 फ्रंट पर युद्ध कर रहा है. एक तो चीन और दूसरा पाकिस्तान. हालांकि दोनों ही तरफ से अघोषित युद्ध किया जा रहा है. चीन जहां सैन्य क्षमता व आर्थिक मामलों को लेकर भारत को धमकी दे रहा है. वहीं आतंकवाद की परिभाषा बन चुका पाकिस्तान लगातार LOC के जरिए आतंकियों को भारत में घुसाने की कोशिश कर रहा है. साथ ही पाकिस्तानी सेना भी लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रही है. पाकिस्तान इस फ्रंट पर भारत के साथ अघोषित युद्ध कर रहा है. हालांकि भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब भी दिया जा रहा है. लेकिन यह मामला भी भारत के लिए चुनौती से कम नहीं है.