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हर चुनौती पर विजयी होते रहे पीएम नरेंद्र मोदी की दूसरी पारी का आग़ाज़
नरेंद्र मोदी सबका साथ सबका विकास एवं सबका विश्वास' के मूल मंत्र के साथ आगे बढ़ेंगे
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर केंद्र की राजनीति में आने वाले नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने हर मैदान फ़तह करते हुए गुरुवार को प्रधानमंत्री के तौर पर न केवल अपनी दूसरी पारी का आग़ाज़ किया, बल्कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद पूर्ण बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले तीसरे प्रधानमंत्री बन गए.
‘राष्ट्रवाद’ और ‘विकास’ के नारे के साथ अपने करिश्माई व्यक्तित्व से भगवा परचम लहराने वाले मोदी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव में भाजपा को कई राज्यों में 50 फीसदी से अधिक वोट और 303 सीटें मिलीं, जबकि 2014 के आम चुनाव में बीजेपी ने 282 सीटों पर जीत हासिल की थी. आंकड़े गवाह हैं कि इस बार बीजेपी ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा जैसे कई राज्यों में अपना मत प्रतिशत बढ़ाया है. निश्चित तौर पर इस पूरी जीत के केंद्र में मोदी रहे हैं.
राष्ट्रवाद और विकास के नारे के साथ बुलंद होते मोदी ने न केवल हिन्दी में बेबाक हो कर अपनी बात रखी, बल्कि चुनाव की महाभारत में अभिमन्यु के साथ साथ अर्जुन की भूमिका भी निभाई. करारे आरोपों प्रत्यारोपों के बाद जब जीत हासिल हुई तो मोदी ने कहा कि वह पुरानी बातें भूल कर ‘सबका साथ सबका विकास एवं सबका विश्वास’ के मूल मंत्र के साथ आगे बढ़ेंगे.
Delhi: Narendra Modi takes oath as the Prime Minister of India for a second term. pic.twitter.com/7AlZZr8klA
— ANI (@ANI) May 30, 2019
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने तक मोदी का सफर लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा . 2014 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी गुजरात में 12 साल तक मुख्यमंत्री रहे. साथ ही उन्होंने पार्टी में तमाम तरह की जिम्मेदारियां निभाईं. उनकी छवि एक विकास पुरुष और भाजपा के ऐसे कर्णधार की रही जिनकी वजह से भाजपा अपने दम पर 303 सीटें जीत गई.
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लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए मोदी पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद पूर्ण बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले तीसरे प्रधानमंत्री हैं.
प्रधानमंत्री के रूप में पिछले कार्यकाल के दौरान मोदी की महत्वपूर्ण पहलें जनधन योजना, ‘डिजिटल इंडिया’, आयुष्मान भारत, सभी को आवास, किसान सम्मान योजना, शौचालय एवं स्वच्छता अभियान आदि हैं . नोटबंदी और जीएसटी उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण सुधार पहल हैं.
उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा आतंकी हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक को मोदी सरकार के मजबूत फैसले के रूप में देखा गया. लोकसभा चुनाव में भी राष्ट्रीय सुरक्षा सहित एयर स्ट्राइक के मुद्दे को भाजपा ने सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर रखा. और नतीजा सामने है.
17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर में जन्मे मोदी के पिता का नाम दामोदर दास और मां का नाम हीराबेन है. बचपन में मोदी वडनगर स्टेशन पर अपने पिता और भाई किशोर के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे .
स्कूल के दिनों में मोदी एक्टिंग, वाद-विवाद, नाटकों में भाग लेते और पुरस्कार जीतते थे. वह एनसीसी में भी शामिल हुए. अभिनय का शौक वे 1975 में आपातकाल के दिनों में भी काम आया जब मोदी सरदार का रूप धरकर कई महीने पुलिस को छकाते रहे.
बचपन से ही संघ की तरफ झुकाव रखने वाले मोदी ने 1967 में 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया . अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता लेने वाले मोदी बरसों बरस संघ के प्रचारक रहे. 1974 में वह नव-निर्माण आंदोलन में शामिल हुए . पढ़ाई जारी रही और मोदी ने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए किया.
कभी नरेन्द्र मोदी ने संघ में कुर्ते की बांह इसलिए छोटी करवाई थीं, कि कपड़ा ज्यादा खराब न हो. आज वह छोटी बांह वाला कुर्ता देश भर में मशहूर हो कर मोदी ब्रांड का कुर्ता बन गया है.
हिन्दी, अंग्रेजी और गुजराती भाषा पर गहरी पकड़ रखने वाले मोदी का भाजपा से परिचय संघ के जरिए हुआ. 1980 के दशक में वह गुजरात की भाजपा इकाई में शामिल हुए. 1988-89 में उन्हें भाजपा की गुजरात इकाई का महासचिव बनाया गया.
लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा करने के बाद 1995 में मोदी को भाजपा का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया. समय के पाबंद मोदी को 1998 में महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी मिली और इस पद पर वह अक्टूबर 2001 तक रहे.
2001 में केशुभाई पटेल को हटा कर मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया और इस पद पर वह लगातार 2014 तक रहे. सितंबर 2014 में मोदी को पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया . इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा 282 सीट जीतने में सफल रही और केंद्र में राजग की सरकार बनी. इस बार ‘‘मोदी मोदी’’ के नारे के बीच यह संख्या बढ़ कर 303 हो गई.
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