नई दिल्ली, 6 जनवरी | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा नदी को गंदा न करने की मंगलवार को सार्वजनिक अपील की और इसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए समयबद्ध, तत्काल कदम उठाने तथा एकमत होकर पूर्ण प्रयास करने का आह्वान किया। ‘नमामि गंगे’ परियोजना पर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक अपील की, “गंगा को गंदा न करें।” इस बैठक में शीर्ष सरकारी अधिकारियों के अलावा केंद्रीय मंत्री एम.वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी, उमा भारती तथा प्रकाश जावड़ेकर मौजूद थे।

मोदी ने कहा कि प्रदूषण तथा प्रदूषण के स्रोत को रोकने के लिए नमामि गंगे को अपना ध्यान शहरों की गंदगी तथा औद्योगिक कचरों पर केंद्रित करना चाहिए। प्रधानमंत्री सचिवालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, गंगा के किनारे स्थित कुल 764 ऐसी औद्योगिक इकाइयों की पहचान की गई है, जहां से गंगा में सर्वाधिक प्रदूषण फैलता है। गंगा नदी में सर्वाधिक तीन-चौथाई से ज्यादा कचरा चमड़ा उद्योग, कागज और चीनी उद्योग फैलाते हैं।

औद्योगिक अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए औद्योगिक इकाइयों को प्रेरित करना चाहिए तथा ऐसा न करने पर उनके खिलाफ मौजूदा कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। बयान के मुताबिक, मोदी ने निजी तौर पर किए जाने वाले प्रयासों और उद्यमियों के सहयोग से गंगा किनारे आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल शवदाह गृह बनाने की संभावना तलाशने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने गंगा नदी को स्वच्छ रखने में सहायता के लिए स्वयंसेवकों के समूह ‘गंगा वाहिनी’ के गठन को भी स्वीकृति दी।