8 नवंबर 2016 की शाम 8 बजे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश के नाम संबोधन। पीएम मोदी ने एक ऐसा फैसला लिया जिससे पूरे देश में हलचल मच गई। ये फैसला नोटबंदी का था। इस निर्णय को 50 दिन पूरे हो चुके हैं। पिछले 50 दिनों से देश अफरा-तफरी के माहौल से गुजर रहा है। इस बीच पीएम ने रेडियो, ट्विटर और सभाओं में एकतरफा संवाद तो लगातार जारी रखा लेकिन नोटबंदी के फैसले के बाद पहली बार कोई इंटरव्यू किया है। यह इंटरव्यू उन्होंने इंडिया टुडे के साथ किया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने नोटबंदी और उससे जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात की है। आइए जानते हैं नोटबंदी के फैसले के बाद पीएम मोदी के इस इंटरव्यू की 10 बड़ी बातें… (यह भी पढ़ेंः नोटबंदी के 50 दिन पूरेः वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गिनाए नोटबंदी के ये 5 बड़े फायदे) Also Read - मिथुन चक्रवर्ती बीजेपी में शामिल होंगे! PM मोदी के साथ मंच साझा कर सकते हैं, कैलाश विजयवर्गीय से फ़ोन पर की बात

  • नोटबंदी के नतीजे से संतुष्टि के बारे में सवाल पूछे जाने पर पीएम ने कहा कि यह फैसला कालाधन, भ्रष्टाचार, नकली नोट, आतंकवाद इत्यादि से निपटने के लिए लिया गया था। इस फैसले के बाद इन सभी की कमर टूट गई।
  • हर कालेधन का बहीखाता हमारे पास है। नोटबंदी के फैसले ने निश्चित तौर पर कालेधन को बाहर निकाला है। हमने नोटों की वापसी के लिए पुराने नोटों को लेने की इजाजत इसलिए दी थी कि पैसा बैंकिंग सिस्टम में वापस आ जाए। अंदर छुपा सारा धन बैंकों में जमा हो गया। पैसे की गुमनामी खत्म हो गया।
  • हम लोग नोटबंदी के फैसले में 40 साल पीछे हैं। यह फैसला 40 साल पहले ही ले लिया जाना चाहिए था। अगर अभी भी फैसला न लेेते तो और पीछे हो जाते। ये एक बड़ा फैसला है।
  • सरकार ने कालेधन को खत्म करने के लिए जो तमाम कदम उठाए हैं, नोटबंदी उनमें से ही एक कदम है। जीएसटी और डिजिटल बैंकिंग से कालेधन पर लगाम लगेगी।
  • 8 नवंबर को राष्ट्र के नाम हमने साफ कहा था कि ये बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ लड़ाई है। वो जब बचने की अपनी रणनीति बदलते हैं तो हमें भी बदलना जरूरी है। इसलिए हमें बार-बार गाइडलाइन जारी करनी पड़ी।
  • डिजिटल लेन-देन कोई नकदी की कमी के लिए उठाया गया थोड़े समय का समाधान नहीं है। डिजिटल कारोबार व्यवस्थित कारोबार को बढा़ता है। यह छोटे कारोबारियों और सामान्य लोगों के लिए बेहद सुरक्षित है।
  • मुझे अपने विरोधियों की हताशा देखकर हँसी आती है। एक तरफ तो वो कहते हैं कि यह राजनीतिक कदम है और दूसरी तरफ कहते हैं कि इससे जनता नाराज है। मैं साफ कर देना चाहता हूँ कि यह कोई राजनीतिक कदम नहीं है।
  • इस फैसले के बाद जो पैसा छिपा कर रखा गया था वो अब सबके सामने आ चुका है। इससे मिलने वाले राजस्व से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। जिसका इस्तेमाल हम गरीबों और हासिए पर पड़े लोगों के कल्याण के लिए होगा।
  • ये जरूरी है कि हम राजनीति से कालेधन को खत्म करने के लिए बड़े कदम उठाएँ। मैंने खुद सदन में ये बात उठाई है कि राजनीति से कालेधन को खत्म करने के लिए साझा प्रयास किए जाने चाहिए।
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