नई दिल्ली. 13 मार्च को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) से साल 2025 तक भारत को मुक्त करने का अभियान लॉन्च किया था. उन्होंने कहा था कि दुनिया में साल 2030 तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है. इसी को देखते हुए हम पांच साल पहले का ही लक्ष्य रख रहे हैं. उन्होंने कहा था कि भारत इस लड़ाई में प्राइवेट सेक्टर को भी शामिल करेगा. Also Read - अतिरिक्त टीबी के मरीजों के लिए कहर बनेगा कोरोना, 5 साल में 95 हज़ार मौतों की आशंका

मोदी सरकार अपने इस अभियान को जमीन पर लाने के लिए सख्त रुख अपनानी शुरू कर दी है. अब टीबी के मरीजों की जानकारी छुपाना डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन के लिए मुसीबत बन सकता है. इसमें दोषी पाए जाने पर जेल तक का प्रावधान बनाया गया है. Also Read - दिल्ली में जानबूझकर हिंसा की गई, सरकार ऐसी घटनाएं बर्दाश्त नहीं करेगी: केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री

दो साल तक हो सकती है सजा
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि डॉक्टर टीबी मरीज की जानकारी नोडल अधिकारी या स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के साथ साझा करें. ऐसा नहीं करने पर संबंधित डॉक्टर, अस्पताल प्रबंधन और दवा दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. उन्हें आईपीसी की धारा 269 और 270 के तहत छह महीने से लेकर दो साल तक जेल के साथ-साथ जुर्माना भी भरना पड़ सकता है. Also Read - डॉक्टर की करतूत- कैंसर का डर दिखा छूता था ब्रेस्ट और प्राइवेट पार्ट, अब खाएगा जेल की हवा

मौत के 10 बड़े कारणों में से एक
बता दें कि यूपीए-2 के समय ही टीबी को सूचनात्मक रोग घोषित किया गया था. इस नियम के तहत टीबी के मरीज की सूचना नोडल अधिकारी और स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के साथ साझा करना जरूरी है. लेकिन, उस समय इस मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों पर किसी तरह की सजा या कार्रवाई का प्रावधान नहीं था. दुनियाभर में बीमारियों से मौत के 10 बड़े कारणों में टीबी एक है. भारत में हर साल 4 लाख 80 हजार लोगों की मौत इस रोक से होती है. वहीं, 10 लाख से अधिक मरीजों के बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं मिलती है.