नई दिल्ली. कर्नाटक चुनाव के रुझानों में बीजेपी की आंधी चली है. बीजेपी पूर्णबहुमत के साथ दक्षिण भारत में एक बार फिर से एंट्री कर रही है. कर्नाटक का ये चुनाव साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए काफी महत्वपूर्ण है. इस चुनाव में भी नरेंद्र मोदी की लहर बरकरार है. वहीं, अमित शाह की पूरी रणनीति कारगर साबित होती दिख रही है. बीजेपी की जीत के ये 5 महत्वपूर्ण कारण हैं…

1. नरेंद्र मोदी की लहर
कर्नाटक चुनाव ने साफ कर दिया है कि साल 2014 से शुरू नरेंद्र मोदी लहर अभी खत्म नहीं हुआ है. 10 दिन में नरेंद्र मोदी ने राज्य के पूरे चुनाव की रूप-रेखा को बदल दिया है. अपनी 21 चुनावी रैलियों में नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रिय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के जो मुद्दे उठाए, उससे कांग्रेस और जेडीएस बैकफुट पर दिखे. उन्होंने कांग्रेस और सिद्धारमैया पर जिस तरह से निशाना साधा, उसने पूरा समीकरण बदल दिया. हालात यहां तक आ गए कि सिद्धारमैया को कई बार कहना पड़ा कि ये चुनाव सिद्धारमैया बनाम नरेंद्र मोदी नहीं, बल्कि येदियुरप्पा है. लेकिन मोदी तो मोदी हैं. उन्होंने एक के बाद एक मुद्दों से विपक्षियों को पूरी तरह धाराशाही कर दिया.

2. 5. अमित शाह की सोशल इंजीनियरिंग
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का चुनाव लड़ने का अपना तरीका है. वह पन्ना प्रमुख से लेकर, बूथ, पोलिंग स्टेशन, वार्ड, विधानसभा, जिले और प्रत्याशी तक पर रणनीति बनाते हैं. कर्नाटक में अपने 34 दिन के प्रवास के दौरान अमित शाह ने 57 हजार किमी की यात्रा की. ऐसे में उन्हें पूरे 30 जिले का दौरा किया और कार्यकर्ताओं से सीधे बात कर संदेश दिया. अमित शाह जातियों को साधने में कामयाब रहे. उन्होंने सीट दर सीट जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर प्रत्याशियों को उतारा और नतीजा सामने है.

3. तटीय इलाकों में हिंदुत्व का असर
देखा जाए तो कर्नाटक के पांचों रीजन में बीजेपी ने बेहतर किया है. लेकिन तटीय इलाकों में उसका हिंदुत्व कार्ड चल गया है. बीजेपी ने लिंगायतों के मुद्दे को इस तरह से दिखाया कि इससे हिंदुओं को बांटा जा रहा है. हिंदू एकता को यह खतरा है. रुझान देखकर साफ लगता है कि बीजेपी जनता को यह समझाने में सफल हो गई.

4. दलित वोटबैंक साधने में कामयाब
कर्नाटक में दलित वोटबैंक काफी अहम रहा. इसका एक उदाहरण आप वोटिंग खत्म होने के अगले दिन सिद्धारमैया के उस बयान से भी देख सकते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि दलित सीएम बनेगा. बीजेपी ने दलितों को साधने की रणनीति बनाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विपक्ष द्वारा दिए गए बयानों की भी आलोचना की और दलितों को ये समझाने में कामयाब रहे कि बीजेपी उनके साथ हर मोर्चे पर खड़ी है.

5. लिंगायतों ने बीजेपी पर जताया भरोसा
चुनाव से ठीक पहले सिद्धारमैया ने लिंगायत को अलग धर्म की मान्यता दे कर एक अलग तरह की रणनीति बनाई थी. राज्य की आबाद में सबसे मजबूती से दखल देने वाले लिंगायतों को साधने के लिए सिद्धारमैया की रणनीति पर बीजेपी ने इसे हिंदुओं को बांटने की राजनीति बताया. दूसरी तरफ लिंगायत समुदाय से आने वाले येदियुरप्पा बहुत शांति से चुनाव में लगे रहे. बीजेपी ने टिकट बंटवारे में बी लिंगायतों का खासा ध्यान दिया. ऐसे में रुझानों के बाद साफ दिखता है कि लिंगायतों ने बीजेपी पर पूरा भरोसा जताया है.