लखनऊ: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं. सपा ने अग्रवाल को इस बार राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया जिससे वह नाराज थे. सपा में वर्चस्व की लड़ाई के दौरान नरेश अग्रवाल ने मुलायम के बजाय अखिलेश यादव का साथ दिया था, लेकिन जब एक सीट पर राज्यसभा उम्मीदवार के चयन की बात आई तो अखिलेश ने नरेश अग्रवाल का साथ छोड़ दिया और जया बच्चन का नाम आगे कर दिया. नरेश अग्रवाल ने बीजेपी हेडक्वॉर्टर पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता ली. Also Read - Dhule-Nandurbar Local Body by-elections Result: धुले-नंदुरबार निकाय उपचुनाव में भाजपा की शानदार जीत, महाविकास आघाडी की बुरी हार

बीजेपी में शामिल होने के बाद नरेश अग्रवाल ने सपा और जया बच्चन को निशाने पर लिया. अग्रवाल ने कहा, फिल्मों में काम करने वाली से मेरी हैसियत कर दी गई. उनके नाम पर हमारा टिकट काटा गया. मेरी कोई शर्त नहीं है. मैंने राज्यसभा का टिकट नहीं मांगा है. मैं राज्यसभा टिकट के लिए बीजेपी में शामिल नहीं हुआ हूं और न ही मैंने कोई शर्त रखी है.

राज्यसभा में पिछले कई सालों से बीजेपी और नरेंद्र मोदी सरकार के सबसे मुखर आलोचकों में से एक अग्रवाल ने प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की तारीफ की. अग्रवाल ने अपने 30 साल के राजनीतिक करियर में बार-बार पार्टी बदली है. इससे पहले वह जगदम्बिका पाल, राजीव शुक्ला और श्याम सुंदर शर्मा के साथ अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस में थे जिसने वर्ष 1997 में उत्तर प्रदेश में भाजपा के कल्याण सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के साथ गठबंधन किया था.

पहले कांग्रेस-बसपा, फिर सपा, अब बीजेपी का मोह
यूपी के हरदोई के रहने वाले नरेश अग्रवाल का जन्म 1951 में हुआ. वे 1980 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधायक बने थे. इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता और जनसंघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गंगाभक्त सिंह हराया था. काफी समय कांग्रेस में रहने के बाद नरेश अग्रवाल बसपा में शामिल हो गए. बसपा में वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव थे. बसपा ने उन्हें लोकसभा का चुनाव भी लड़वाया था लेकिन वह चुनाव हार गए थे. बसपा के बाद वे सपा में आ गए. सपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा. राज्यसभा में वह पार्टी की तरफ से आवाज उठाने वालों में सबसे आगे रहे.

भाजपा लड़वा सकती है राज्यसभा का चुनाव
माना जा रहा है कि भाजपा नरेश अग्रवाल को राज्यसभा चुनाव लड़वा सकती है. भाजपा विधानसभा में संख्या बल के जरिये अपने 8 उम्मीदवार आसानी से जिता सकती है. उसके पास जो अतिरिक्त वोट हैं और सहयोगी दलों के वोटों के बलबूते वह सपा-बसपा-कांग्रेस-रालोद के संयुक्त उम्मीदवार को टक्कर देना चाहती है. यदि भाजपा ने नरेश अग्रवाल को उतारा तो राज्यसभा चुनाव दिलचस्प हो जाएगा, क्योंकि अगर नरेश अग्रवाल सपा के असंतुष्ट विधायकों का वोट हासिल करने में सफल रहते हैं तो यह अखिलेश और मायावती के गठबंधन के लिए झटका होगा. राज्यसभा चुनावों के लिए आज नामांकन का आखिरी दिन है.