Kisan Andolan: किसान संगठनों ने शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा के किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लामबंद करना शुरू कर दिया. वहीं, शिरोमणि अकाली दल और इनेलो जैसे राजनीतिक दलों ने भी किसानों का साथ देने की घोषणा की.Also Read - हरियाणा: कक्षा 5वीं और 8वीं के लिए भी होंगी बोर्ड परीक्षाएं, श‍िक्षा मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन

केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली-उत्तरप्रदेश की सीमा पर गाजीपुर में भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शन के समर्थन में हजारों किसानों ने शुक्रवार को मुजफ्फरनगर में एक महापंचायत में हिस्सा लिया. गाजीपुर में बीकेयू के नेता राकेश टिकैत के रोने और वहां दो महीने से प्रदर्शन कर रहे किसानों को स्थानीय प्रशासन द्वारा जबरन हटाने की आशंकाओं के एक दिन बाद पश्चिम उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर में भारी संख्या में लोग एकजुट हुए. Also Read - एलन मस्क के लिए पलक पांवड़े बिछाने को तैयार हैं कई राज्य, अब बेंगलुरु में टेस्ला प्लांट स्थापित करने के लिए किया आमंत्रित

उनकी भावनात्मक अपील को टेलीविजन के कैमरों और अन्य मीडिया ने कैद किया और इसे काफी प्रसारित किया. इससे भीड़ गाजीपुर में यूपी गेट की तरफ रवाना होने की लिए उत्तेजित हुई और वहां लोगों की भीड़ बढ़ गई. महापंचायत ने गाजीपुर प्रदर्शन को पूरा समर्थन देने का संकल्प जताया. Also Read - Capt. Amarinder Singh ने चुनाव से पहले कांग्रेस और मुख्यमंत्री पद छोड़कर बनाई नई पार्टी, जानें उनके बारे में सबकुछ

गाजीपुर में बृहस्पतिवार की घटना के बाद महापंचायत बुलाने वाले राकेश टिकैत के भाई नरेश टिकैत ने उत्तेजित भीड़ से कहा कि वे दिल्ली बॉर्डर की तरफ कूच करें जो यहां से करीब 100 किलोमीटर दूर है. गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई अराजकता को देखते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को वहां शांतिपूर्ण तरीके से जाना चाहिए और बड़े जत्थे के बजाए छोटे समूहों में जाना चाहिए.

महावीर चौक के पास जीआईसी मैदान खचाखच भरा हुआ था. लोग गाजीपुर में यूपी गेट पर प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए एकजुट हुए थे. शहर की सड़कों पर सैकड़ों ट्रैक्टरों पर तिरंगा और किसान संगठनों के झंडे लहरा रहे थे. इस कारण यातायात बाधित रहा.

किसान नेताओं ने दावा किया कि जींद, हिसार, भिवानी और रोहतक सहित हरियाणा के कई हिस्सों से किसानों ने केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली की सीमाओं की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है. इन लोगों का कहना है कि किसान नेताओं के खिलाफ सरकार के कदम से उनका आंदोलन कमजोर नहीं होगा.

भारतीय किसान यूनियन (चडूनी) के एक नेता ने कहा कि हरियाणा में कई खाप पंचायतों ने बैठकें कीं और किसान आंदोलन को समर्थन देने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि कई गांवों ने प्रदर्शन में अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली भेजने का फैसला किया है. शिरोमणि अकाली दल ने आज अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे दिल्ली की सीमाओं पर तीन प्रदर्शन स्थलों पर आंदोलन को मजबूती देने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचें.

कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे और राकेश टिकैत से मिलकर किसानों के प्रति एकजुटता व्यक्त की. नए कृषि कानूनों के विरोध में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके इनेलो नेता अभय चौटाला ने कहा कि वह शनिवार को गाजीपुर प्रदर्शन स्थल पर जाएंगे और टिकैत तथा किसानों के साथ एकजुटता व्यक्त करेंगे. वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि लालकिला परिसर की घटना के चलते किसानों के खिलाफ किया जा रहा दुष्प्रचार बंद किया जाना चाहिए. सिंह ने यहां एक बयान में कहा, ‘‘जो हो रहा है और आज जो सिंघू बॉर्डर पर हुआ, पाकिस्तान वही चाहता है.’’

भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) के एक किसान नेता ने कहा कि अगले कुछ दिन में सिंघू तथा टीकरी बॉर्डरों की तरफ और किसान जाएंगे. उल्लेखनीय है कि गाजियाबाद प्रशासन ने आंदोलनकारी किसानों को मध्य रात्रि तक यूपी गेट खाली करने का बृहस्पतिवार को अल्टीमेटम दिया था जबकि दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं के खिलाफ ‘लुकआउट’ नोटिस जारी किए थे.

दिल्ली के सीमावर्ती गाजीपुर में यूपी गेट पर आंदोलन स्थल पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत बृहस्पतिवार की शाम मीडिया से बात करते हुए रोने लगे थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि नए कृषि कानूनों को निरस्त न कर सरकार द्वारा किसानों के साथ ‘‘अन्याय’’ किया जा रहा है. एक आंदोलनकारी किसान ने शुक्रवार को रोहतक के एक टोल प्लाजा के निकट कहा, ‘‘हम एक किसान नेता के साथ ऐसा बर्ताव सहन नहीं कर सकते. हम सभी एकजुट हैं और हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार कृषि कानूनों को रद्द नहीं करती.’’

जींद के कंडेला में किसानों ने बृहस्पतिवार की रात जींद-चंडीगढ़ सड़क को कुछ घंटे के लिए जाम कर दिया था. वे गाजियाबाद प्रशासन द्वारा यूपी गेट को खाली करने संबंधी किसानों को दिए गए अल्टीमेटम का विरोध कर रहे थे. खाप नेता आजाद सिंह पालवा ने जींद में पत्रकारों से कहा कि यह प्रचार किया जा रहा है कि किसानों का आंदोलन कमजोर हुआ है, जबकि ऐसा नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘‘हम किसान नेताओं को जारी किए गए लुकआउट नोटिस की निंदा करते हैं. हम सरकार को एक विरोध स्थल खाली करने के लिए अल्टीमेटम देने की भी निंदा करते हैं. हम सरकार को चेतावनी देना चाहते हैं कि इस तरह के कदम से आंदोलन कमजोर नहीं होगा, बल्कि यह और मजबूत होगा.’’

सिंह ने कहा कि आंदोलन से और लोगों को जोड़ने के वास्ते ग्रामीणों तथा लोगों से चंदा एकत्र किया जाएगा. करनाल में स्थानीय किसानों ने बृहस्पतिवार को बस्तारा टोल प्लाजा पर अपना ‘धरना’ फिर शुरू किया था. हालांकि शुक्रवार को टोल प्लाजा के निकट भारी पुलिस बल तैनात करने की खबरें हैं और प्रशासन ने विरोध स्थल को फिर से खाली करा लिया है और प्लाजा पर सामान्य कामकाज शुरू हो गया है.

इस बीच, हरियाणा बीकेयू के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने एक वीडियो संदेश में अपने समर्थकों से दिल्ली की सीमाओं के निकट विरोध स्थलों पर पहुंचने की अपील की. उन्होंने किसानों से 30 जनवरी को हरियाणा के सभी टोल प्लाजा पर धरना देने की भी अपील की.

(इनपुट भाषा)