नई दिल्ली। दुनिया का सबसे हल्का सैटेलाइट लॉन्च कर भारत ने एक बार फिर वैश्विक अंतरिक्ष रिकॉर्ड तोड़ दिया है. कलामसैट नाम के इस सैटेलाइट का वजन महज 64 ग्राम है, जिसे पेशेवर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने नहीं बल्कि तमिलनाडु के 18 वर्षीय रिफ़्त शरूक और उसकी टीम ने मिलकर बनाया है.

कलामसैट बनाने वाले रिफ़्त शरूक की टीम में विनय भारद्वाज, तनिष्क द्विवेदी, यग्नासाई, अब्दुल कासिफ और गोबी नाथ शामिल हैं. कलामसैट नाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर लिखा गया है. स्पेस किड्ज इंडिया के संस्थापक और सीईओ डॉक्टर श्रीमती केसन के देखरेख में कलामसैट को तैयार किया गया है.

कलामसैट को नासा साउडिंग रॉकेट के जरिए अमेरिका के वैलोप द्वीप से अंतरिक्ष में भेजा गया. सैटलाइट लॉन्चिंग के बाद छात्रों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी.

सैटेलाइट के लॉन्च के बाद अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में मिशन डायरेक्टर श्रीमती केसन ने कहा कि रॉकेट का फ्लाइट टाइम 240 मिनट था. उन्होंने बताया कि लॉन्च के 125 मिनट के बाद सैटेलाइट रॉकेट से अलग हो गया.

कलामसैट 3-डी प्रिंटेड रीइनफोर्सड कॉर्बन फाइबर पॉलिमर से बना है. इस सैटेलाइट के कुछ हिस्से विदेश से भी आयात किए गए हैं. इसमें कई तरह के सेंसर और सोलर पैनल भी लगाए गए हैं.