नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में होने वाले पंचायत चुनाव का नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बहिष्कार का फैसला किया है.पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार अनुच्छेद 35 A को लेकर अपना रुख साफ नहीं कर देती तब तक पार्टी पंचायत चुनाव में भाग नहीं लेगी. फारूक अब्दुल्ला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस तब तक इन (पंचायत) चुनावों में भाग नहीं लेगी जब तक भारत सरकार और राज्य सरकार इस (35 A) पर अपना रुख साफ नहीं कर देतीं और अनुच्छेद 35 A को कोर्ट में सुरक्षित रखने के लिए कदम नहीं उठा लेती हैं. Also Read - 15 अगस्त के बाद जम्मू-कश्मीर में बहाल की जाएगी 4जी इंटरनेट सेवा, जानिए कैसे पूरी होगी प्रक्रिया

Also Read - जम्मू-कश्मीरः रामबन में अतिक्रमण हटाने गए वन विभाग और पुलिस कर्मियों पर पथराव, 18 कर्मचारी घायल

कश्मीर: सौतेली मां ने 9 साल की बेटी का कराया गैंगरेप, बेरहमी से हत्या Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से कहा- कुछ इलाकों में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने की संभावना तलाशें

अनुच्छेद 35-ए के तहत जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को खास तरह के अधिकार और कुछ विशेषाधिकार दिए गए हैं. अनुच्छेद 35 ए को 1954 में राष्ट्रपति के आदेश (प्रेसीडेंशियल आर्डर) से संविधान में शामिल किया गया था. इसके तहत जम्मू कश्मीर के नागरिकों को कुछ विशेष अधिकार प्राप्त हैं. इस अनुच्छेद में की गई व्यवस्था के तहत राज्य के बाहर का कोई भी व्यक्ति प्रदेश में अचल संपत्ति नहीं खरीद सकता है. यह व्यवस्था प्रदेश की उस महिला को भी संपत्ति अधिकारों से वंचित कर देती है जो राज्य के बाहर विवाह करती है. यह प्रावधान उनके उत्तराधिकारियों पर भी लागू होता है.

UIADAI ने कहा- आधार कार्ड के अभाव मे दाखिला देने से इंकार नहीं कर सकते स्कूल

वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था की समस्या के बारे केन्द्र और राज्य सरकार के कथन के मद्देनजर संविधान के अनुच्छेद 35-ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई अगले साल जनवरी के लिए स्थगित कर दी है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की खंडपीठ से केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अनुच्छेद 35-ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया था.

गुजरात के पूर्व चर्चित IPS अफसर संजीव भट्ट को सीआईडी ने किया गिरफ्तार

उनका कहना था कि राज्य में आठ चरणों में सितंबर से दिसंबर के दौरान स्थानीय निकाय के चुनाव हो रहे हैं और वहां कानून व्यवस्था की समस्या है. इन याचिकाओं पर सुनवाई अगले साल जनवरी के दूसरे सप्ताह के लिये स्थगित करते हुये पीठ ने कहा, ‘चुनाव हो जाने दीजिये. हमें बताया गया है कि वहां कानून व्यवस्था की समस्या है.

राज्य में 4,500 सरपंचों और दूसरे स्थानीय निकाय के पदों के लिये आठ चरणों में सितंबर से दिसंबर के दौरान चुनाव होंगे. अटार्नी जनरल ने कहा कि बड़ी संख्या में अर्द्धसैनिक बल वहां पर तैनात हैं. वहां शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव हो जाने दीजिये और इसके बाद जनवरी या मार्च में इन याचिकाओं पर सुनवाई की जा सकती है. यह विषय बहुत ही संवेदनशील है.

BJP सांसद ने कहा, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा हो, राजस्थान में फैल रहा सॉफ्ट नक्सलिज्म

अतिरिक्त सालिसीटर जनरल का कहना था कि हालांकि यह मुद्दा लैंगिक भेदभाव से संबंधित है परंतु इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिये यह उचित समय नहीं है. संविधान के इस अनुच्छेद का विरोध कर रहे समूह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर जाकर वहां 60 साल से रहने वाले लोगों को वहां रोजगार या मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेजों में शिक्षा के लिये प्रवेश का लाभ नहीं मिल रहा है.