1700 की चप्पल महीनेभर में टूटी तो कस्टमर ने किया कुछ ऐसा, शोरूम मैनेजर की गिरफ्तारी का निकल गया वॉरन्ट

Consumer Protection Act: नाप-तौल में गड़बड़ी, सेवा में कमी या घटिया क्वॉलिटी के सामान वगैरह समस्याओं से निजात दिलाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण कानून लागू है. राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में कंज्यूमर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और अपने हक वापस पा सकते हैं.

Published date india.com Published: December 25, 2025 11:08 PM IST
1700 की चप्पल महीनेभर में टूटी तो कस्टमर ने किया कुछ ऐसा, शोरूम मैनेजर की गिरफ्तारी का निकल गया वॉरन्ट
सांकेतिक फोटो.

रोजमर्रा काम में आने के लिए हम कई चीजों की खरीददारी करते हैं. क्वॉलिटी अच्छी हो, इसके लिए हम ब्रांडेड सामानों पर पैसे भी खर्च करते हैं, लेकिन कई बार शोरूम से खरीदी गई ब्रांडेंड चीजें या प्रोडक्ट भी घटिया क्वॉलिटी की निकल जाती हैं. दुकानदार हमें खराब माल पकड़ा देते हैं. वापस करने जाओ, तो नो रिटर्न पॉलिसी का हवाला देते है. ऐसे में हम ठगा हुआ सा महसूस करने लगते हैं. अगर कोई प्रोडक्ट खराब और मिलावटी निकले, तो व्यक्ति का अधिकार बनता है कि वह कंज्यूमर फोरम में इसकी शिकायत करे और मुआवजा लें.

देश में लागू है उपभोक्ता संरक्षण कानून लागू
नाप-तौल में गड़बड़ी, सेवा में कमी या घटिया क्वॉलिटी के सामान वगैरह समस्याओं से निजात दिलाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण कानून लागू है. देशभर में 630 से ज्यादा उपभोक्ता अधिकार अदालतें या उपभोक्ता वाद न्यायालय हैं. हर जिला फरम में अध्यक्ष समेत 3 सदस्य होते हैं.

सीतापुर के शख्स ने लड़ी अपने हक की लड़ाई
उपभोक्ता संरक्षण कानून की बदौलत उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक शख्स ने अपने हक की लड़ाई लड़ी है. इस शख्स ने एक शोरूम से चप्पल खरीदी थी. चप्पल की कीमत 1700 रुपये थी. लेकिन, यही चप्पल अब शोरूम के मैनेजर के गले की फांस बन चुका है. शख्स की शिकायत के मुताबिक, इस्तेमाल के महीनेभर के अंदर चप्पल टूट गई. उन्होंने शोरूम में रिटर्न की गुजारिश की थी. लेकिन, शोरूम ने नो रिटर्न पॉलिसी का हवाला देकर शख्स को चलता कर दिया था. इसके बाद ये शख्स जिला उपभोक्ता अदालत में गया और केस दर्ज करा आया. जिसके बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने शोरूम के मैनेजर मोहम्मद उस्मान के खिलाफ गैर-जमानती वॉरन्ट जारी कर दिया है. यह कार्रवाई उपभोक्ता फोरम के आदेशों की लगातार अवहेलना के चलते की गई है.

कब का है मामला?
पीड़ित का कहना है कि जब वह शिकायत लेकर शोरूम पहुंचा, तो पहले उसे टालमटोल का सामना करना पड़ा. बाद में शोरूम मैनेजर ने चप्पल अपने पास रख ली, लेकिन न तो नई चप्पल दी गई और न ही पैसे वापस किए गए. लगातार परेशान होने के बाद उन्होंने 17 अक्टूबर 2022 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर किया था.

9000 रुपये का हर्जाना देने का था आदेश
उपभोक्ता फोरम ने शोरूम मैनेजर को कई बार नोटिस जारी किया. आरोप है कि मैनेजर न तो फोरम में पेश हुआ और न ही उसने किसी के जरिए अपना पक्ष रखा. इसके बाद 8 जनवरी 2024 को फोरम ने आदेश पारित करते हुए शोरूम मैनेजर को चप्पल की कीमत लौटाने के साथ मानसिक उत्पीड़न के लिए 2500 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5000 रुपये यानी कुल 9200 रुपये का पेमेंट करने का निर्देश दिया था.

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फिर क्यों जारी हुआ गैर जमानती वॉरन्ट?
रिपोर्ट के मुताबिक, फोरम के इस आदेश का भी शोरूम मैनेजर ने पालन नहीं किया. आदेश की अवहेलना पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 72 के तहत कार्रवाई शुरू की गई. इसके तहत जिला उपभोक्ता फोरम ने पुलिस को 2 जनवरी 2026 तक हर हाल में गैर-जमानती वॉरन्ट की तामील कराते हुए शोरूम मैनेजर को गिरफ्तार कर फोरम के सामने पेश करने का आदेश दे दिया. इस तरह शख्स ने सही जानकारी होने पर अपने हक की लड़ाई लड़ी.

क्या हर मामले की शिकायत जिला उपभोक्ता फोरम में करनी होती है?
नहीं. शिकायत कहां करनी है, इसका निर्धारण कंज्यूमर के नुकसान के आधार पर किया जाता है. अगर नुकसान 20 लाख रुपये से कम का है, तो जिला फोरम में इसकी शिकायत की जा सकती है. 20 लाख से ऊपर और 1 करोड़ रुपये से कम का नुकसान होने पर आप राज्य आयोग पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं. अगर नुकसान एक करोड़ रुपये से ज्यादा है, तो आपको राष्ट्रीय आयोग जाना चाहिए.

शिकायत के लिए कितनी फीस लगती है?
कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत के लिए किसी वकील या सलाहकार की जरूरत नहीं पड़ती. पीड़ित खुद शिकायत कर सकता है. मामले के आधार पर फीस तय की गई है. अलग-अलग राज्यों में ये फीस अलग-अलग है. आमतौर पर 1 लाख रुपये तक के दावे में 100 रुपये, 1 से 5 लाख रुपये तक के दावे के लिए 200 रुपये, 5 से 10 लाख के लिए 400 रुपये, 10 से 20 लाख के लिए 500 रुपये, 20 से 50 लाख रुपये तक के दावे के लिए 2000 रुपये, 50 लाख से 1 करोड़ तक दावे की 4000 रुपये फीस लगती है. इसी तरह 1 करोड़ से ऊपर के दावे की शिकायत की फीस 5000 रुपये है.

कंज्यूमर कोर्ट में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का तरीका?
सबसे पहले edaakhil.nic.in वेबसाइट पर जाकर अपनी ईमेल आईडी रजिस्टर करें. नई शिकायत दर्ज करने के लिए आपके पास पहचान साबित करने का डॉक्यूमेंट जैसे वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड या पैन कार्ड की सॉफ्ट कॉपी होनी चाहिए.अब आपको कंपलेंट और एडवोकेट बटन पर क्लिक करना है. इसके बाद आपके सामने रजिस्ट्रेशन बटन आएगा, उसपर क्लिक करें.फिर एक फॉर्म खुल जाएगा. इसमें एड्रेस, नाम और ईमेल आईडी जैसी जानकारी भरनी है. फिर अपनी शिकायत और बाकी डिटेल भरें.

दस्तावेज भी लगाने जरूरी
आपको अपनी शिकायत से जुड़े दस्तावेज जैसे बिल वगैरह की कॉपी भी अपलोड करनी होगी.सारी जानकारी सबमिट करने के बाद आपके फोन पर एक OTP आएगा.OTP से डिटेल वेरिफाई करें. फिर सबमिट बटन पर क्लिक करें. इसके बाद आपकी मेल आईडी पर मेल आ जाएगा. आपको मेल पर एक रिसिप्ट नंबर और लिंक भेजा जाएगा, जिससे आप कंप्लेन सॉल्व हुई है या नहीं, उसे ट्रैक कर सकते हैं.

शिकायत का निपटारा कितने दिन में होता है?
कंज्यूमर कोर्ट में कंप्लेन का प्रोसेस पूरा करने के बाद जल्दी ही फोरम इस पर सुनवाई करता है. कंज्यूमर को हुए नुकसान या डैमेज की भरपाई कराता है. जरूरत पड़ने पर फोरम कंज्यूमर की मदद भी करता है. शिकायतों के निपटारे में 3 से 5 महीने लगते हैं. इन अदालतों की सुनवाई बेहद सरल भाषा में होती है, ताकि पीड़ित व्यक्ति की शिकायत का जल्द और न्यायपूर्वक हो सके.

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