नई दिल्ली: साइबर फ्रॉड से होने वाले वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ( Ministry OF Home Affairs) ने राष्ट्रीय हेल्पलाइन (National Helpline No) 155260 और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है. हेल्पलाइन और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म से सभी बड़े सरकारी और निजी बैंक जुड़े हैं, जिनमें भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, येस बैंक और कोटक महिंद्र बैंक आदि शामिल हैं. इसमें पेटीएम, फोनपे, मोबिकविक, फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसे भुगतान और वॉलेट मंच भी शामिल हैं.Also Read - कर्नाटक हाईकोर्ट ने अमेजॉन-फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच रोकने की याचिका खारिज की, कैट ने किया स्वागत

मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि राष्ट्रीय हेल्पलाइन और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने वाले लोगों को इस तरह के मामलों की सूचना देने के लिए एक मंच उपलब्ध कराते हैं, जिससे कि खून-पसीने की उनकी कमाई के नुकसान को रोका जा सके. Also Read - What is bridge loan: ब्रिज लोन क्या है और क्या हैं ब्याज दरें, यहां जानिए सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

Also Read - Amazon-Future Group Deal: सीसीआई ने एमेजॉन पर फ्यूचर ग्रुप यूनिट के सौदे में तथ्य छिपाने का आरोप लगाया

बयान में सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृतव में गृह मंत्रालय ने साइबर धोखाधड़ी से होने वाले वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 155260 और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है. संबंधित हेल्पलाइन एक अप्रैल 2021 को सीमित तरीके से शुरू की गई थी.

गृह मंत्रालय के तहत हेल्पलाइन 155260 और इसका रिपोर्टिंग प्लैटफॉर्म को इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन (आई4सी) द्वारा संचालित किया गया है, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक, सभी बड़े बैंकों, भुगतान बैंक, वॉलेट और ऑनलाइन कारोबारियों का सक्रिय सहयोग मिला है.

आई4सी द्वारा कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों और मध्यवर्ती संस्थाओं को एकीकृत करने के लिए वित्तीय नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली संस्थानिक रूप से विकसित की गई है.

इसे वर्तमान में 55260 के साथ सात राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों (छत्तीसगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, उततराखंड और उत्तर प्रदेश) द्वारा किया जा रहा है जिसके दायरे में देश की जनसंख्या का 35 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आता है. धोखाधड़ी के कृत्यों में शामिल लोगों द्वारा जनता से ठगी किए जाने पर अंकुश लगाने के लिए इसे पूरे भारत में लागू करने का काम जारी है.

बयान में कहा गया कि सीमित स्तर पर शुरुआत के बाद दो महीने की छोटी अवधि में ही हेल्पलाइन 155260 से फर्जीवाड़े की 1.85 करोड़ रुपए की रकम जालसाजों के हाथों में जाने से रोकने में मदद मिली है.

ये हेल्पलाइन और इससे जुड़े प्लेटफॉर्म कुछ इस तरह काम करते हैंः

1. साइबर ठगी के शिकार लोग हेल्पलाइन नंबर 155260 पर कॉल करते हैंजिसका संचालन संबंधित राज्य की पुलिस द्वारा किया जाता है.

2. कॉल का जवाब देने वाला पुलिस ऑपरेटर धोखाधड़ी वाले लेनदेन का ब्यौरा और कॉल करने वाले पीड़ित की बुनियादी व्यक्तिगत जानकारी लिखता है, और इस जानकारी को नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली पर एक टिकट के रूप में दर्ज करता है.

3. फिर ये टिकट संबंधित बैंक, वॉलेट्स, मर्चेंट्स आदि तक तेजी से पहुंचाया जाता है, और ये इस बात पर निर्भर करता है कि वे इस पीड़ित के बैंक हैं या फिर वो बैंक/वॉलेट हैं जिनमें धोखाधड़ी का पैसा गया है।

4. फिर पीड़ित को एक एसएमएस भेजा जाता है जिसमें उसकी शिकायत की पावती संख्या होती है और साथ ही निर्देश होते हैं कि इस पावती संख्या का इस्तेमाल करके 24 घंटे के भीतर धोखाधड़ी का पूरा विवरण राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (https://cybercrime.gov.in/) पर जमा करें.

5. अब संबंधित बैंक, जो अपने रिपोर्टिंग पोर्टल के डैशबोर्ड पर इस टिकट को देख सकता है, वो अपने आंतरिक सिस्टम में इस विवरण की जांच करता है.

6. अगर धोखाधड़ी का पैसा अभी भी मौजूद है, तो बैंक उसे रोक देता है, यानी जालसाज उस पैसे को निकलवा नहीं सकता है. अगर वो धोखाधड़ी का पैसा दूसरे बैंक में चला गया है, तो वो टिकट उस अगले बैंक को पहुंचाया जाता है, जहां पैसा चला गया है. इस प्रक्रिया को तब तक दोहराया जाता है जब तक कि पैसा जालसाजों के हाथों में पहुंचने से बचा नहीं लिया जाता.

मौजूदा समय में ये हेल्पलाइन और इसके रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म में सारे प्रमुख सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंक शामिल हैं। इनमें उल्लेखनीय हैं – भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, इंडसइंड, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस, यस और कोटक महिंद्रा बैंक। इससे सभी प्रमुख वॉलेट और मर्चेंट भी जुड़े हुए हैं, जैसे – पेटीएम, फोनपे, मोबीक्विक, फ्लिपकार्ट और एमेजॉन.

इस हेल्पलाइन और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई मौकों पर ठगी के पैसे का नामोनिशान मिटाने के लिए ठगों द्वारा उसे पांच अलग-अलग बैंकों में डालने के बाद भी उसे ठगों तक पहुंचने से रोका गया है

हेल्पलाइन और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म से सभी बड़े सरकारी और निजी बैंक जुड़े हैं , जिनमें भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, येस बैंक और कोटक महिन्द्रा बैंक आदि शामिल हैं. इसमें पेटीएम, फोनपे, मोबिकविक, फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसे भुगतान और वॉलेट मंच भी शामिल हैं.