नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी की उन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा जिसमें उन्होंने वर्ष 2011-12 के टैक्स आकलन के एक मामले को दोबारा खोले जाने में उन्हें राहत देने से इनकार के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. न्यायमूर्ति ए के सीकरी एवं न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ राहुल, सोनिया और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ऑस्कर फर्नान्डिस की याचिकाओं पर सुनवाई करेगी. अपनी याचिकाओं में इन्होंने हाईकोर्ट के 10 सितंबर के आदेश को चुनौती दी है.

टैक्स विभाग ने शीर्ष अदालत में पहले ही एक कैविएट दाखिल कर रखी है कि अगर हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ कोई याचिका दाखिल की जाती है तो ऐसी सूरत में उसका पक्ष भी सुना जाए. गौरतलब है कि 10 सितंबर को राहुल और सोनिया को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली थी जिसने 2011-12 के टैक्स आकलन के एक मामले को दोबारा खोले जाने को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट की ओर से किसी प्रकार की राहत से इनकार ने आयकर विभाग को कांग्रेस नेताओं के आकलन वर्ष 2011-12 के रिकॉर्ड की जांच का मार्ग प्रशस्त कर दिया था.

कांग्रेस नेताओं के खिलाफ आयकर जांच का मुद्दा, भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा नेशनल हेराल्ड मामले के संबंध में निचली अदालत में दाखिल की गयी निजी आपराधिक शिकायत की जांच से उठा था. इस मामले में तीनों जमानत पर हैं. सोनिया और राहुल को निचली अदालत ने 19 दिसंबर 2015 को जमानत दी थी.

वहीं दूसरी ओर सोमवार को छत्तीसगढ़ की रैली में पीएम मोदी ने नोटबंदी के बहाने राहुल और सोनिया के जमानत पर होने का मुद्दा उठाया. उन्होंने नोटबंदी पर सवाल खड़े करने पर राहुल और सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें जमानत पर चल रहे ‘मां-बेटे’ से ‘ईमानदारी के प्रमाणपत्र’ की जरूरत नहीं है.

नोटबंदी का हिसाब मांगने पर राहुल-सोनिया पर सीधा निशाना साधते हुए मोदी ने सवाल किया, ‘जो मां-बेटे रुपयों की हेराफेरी के लिए जमानत पर घूम रहे हैं क्या वे उन्हें ईमानदारी का प्रमाणपत्र बांटेंगे?’ उन्होंने गांधी परिवार के किसी सदस्य का नाम लिये बिना कहा, ‘वे नोटबंदी का हिसाब मांगते हैं. नोटबंदी के कारण फर्जी कंपनियों की पहचान हुई. और इसके कारण आपको जमानत मांगनी पड़ी. आप यह क्यों भूल जाते हैं कि नोटबंदी के कारण आपको जमानत मांगनी पड़ी.’

(इनपुट-भाषा)