नई दिल्ली: पूर्व क्रिकेटर और पंजाब के पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को बड़ी राहत मिली है. सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को सिद्धू पर लगे 30 साल पुराने गैर इरादतन हत्या के आरोपों से उन्हें बरी कर दिया है. सिद्धू को इसके लिए पहले तीन साल जेल की सजा सुनाई गई थी.

न्यायाधीश जे.चेलमेश्वर और न्यायाधीश संजय किशन कौल की पीठ ने सिद्धू को रोडरेज के दौरान गैर इरादतन हत्या के मामले में बरी कर दिया है लेकिन जानबूझकर चोट पहुंचाने के मामले में दोषी ठहराते हुए उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया है. अदालत ने एक अन्य आरोपी उनके कजिन रुपिंदर सिंह सिद्धू को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया है.

2006 में हाईकोर्ट ने सिद्धू को तीन साल की सजा सुनाई थी..
बता दें कि साल 2006 में हाईकोर्ट ने सिद्धू और एक अन्य आरोपी रुपिंदर सिंह संधू को तीन साल की सजा सुनाई हो, लेकिन साल 1999 में ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों को बरी कर दिया था. साल 2007 में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराने के फैसले पर रोक लगा दी थी. कोर्ट के फैसले के बाद ही सिद्धू अमृतसर से विधानसभा चुनाव लड़ पाए थे.

ये है पूरा मामला..
अभियोजन के अनुसार सिद्धू और रुपिंदर सिंह संधू 27 दिसंबर, 1988 को पटियाला में शेरनवाला गेट चौरोह के पास सड़क के बीच में कथित रुप से खड़ी जिप्सी में थे. उसी समय गुरनाम सिंह और दो अन्य पैसे निकालने के लिए मारुति कार से बैंक जा रहे थे. गुरनाम ने सिद्धू और संधू से जिप्सी हटाने को कहा, इस पर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई. सिद्धू ने सिंह को बुरी तरह पीटा और अस्पताल में उनकी मौत हो गई.

(इनपुट-एजेंसी)