नवरात्रि चल रहे हैं. ऐसे में मां दुर्गा को रिझाने के लिए लोग खास इंतजाम कर रहे हैं. इसी क्रम में लगातार तीसरी बार देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए कीमती धातुओं और पत्थरों का उपयोग करने की अपनी परंपरा को जारी रखते हुए, कोलकाता में एक पूजा समिति ने पंडाल में 50 किलो सोने से बनी मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित की है. वर्ष 2017 में, पूजा के आयोजकों ने माँ दुर्गा को सोने की साड़ी में लपेटा था तो वहीं 2018 में उन्हें चांदी के रथ पर सवार किया था. लेकिन इस बार एक कदम और आगे जाते हुए मां दुर्गा की 50 किलो सोने की भव्य मूर्ति स्थापित की है. इस मूर्ति की कीमत 20 करोड़ रुपए बताई जा रही है. इस मूर्ति की ऊंचाई 13 फीट है.

समिति के महासचिव सजल घोष के अनुसार, 250 मजदूरों को पंडाल को पूरा करने में ढाई महीने और मां की मूर्ति लगाने में तीन महीने लग गए. जानकारी के मुताबिक माँ दुर्गा की केवल भुजाएं चांदी की बनी हुई हैं, लेकिन ऊपर से नीचे तक पूरी मूर्ति 50 किलोग्राम सोने की बनी हुई है. पंडाल का इंटीरियर शीश महल की रिप्लिका जैसा है जहाँ कई टन कांच का उपयोग किया गया है. इसके अलावा बाहरी भाग को मायापुर के इस्कॉन टेम्पल की रिप्लिका जैसा बनाया गया है.

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समाचार ऐजेंसी एएनआई के मुताबिक सजल घोष ने आगे कहा कि चूंकि बहुत सी “बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने आभूषण बनाने के लिए मशीनों तैयार की हुई हैं, जिसके कारण बंगाल के स्वर्ण-निर्माताओं का व्यवसाय नीचे चला गया है, वे देश को दिखाना चाहते थे कि केवल ‘विश्वकर्मा’ (स्वर्ण-कलाकार) ही देवी और सोने की साड़ी या चांदी का रथ बना सकते हैं और कोई मशीन नहीं.”